मिडिल ईस्ट में युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट विवाद और अमेरिका की आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी के बीच ईरान को खजाना मिल गया है, जिससे ईरान आर्थिक रूप से कई गुणा ज्यादा मजबूत हो जाएगा. अगर रणनीति बनाकर प्लानिंग के साथ ईरान खजाने का सही इस्तेमाल करेगा तो दुनिया के सबसे अमीर देशों की सूची में शामिल हो सकता है. ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने खजाना मिलने की पुष्टि की और बताया कि देश में हाइड्रोकार्बन के नए और बड़े भंडार मिले हैं, जो लॉटरी से कम नहीं हैं. अब ईरान को अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों से डरने की जरूरत नहीं है.

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ईरान को गैस के नए भंडार कहां मिले हैं?

ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने ईरान पर अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी और दबाव से जुड़े सवाल का जवाब दिया. उन्होंने अमेरिका की गैर-कानूनी नाकेबंदी की आशंकाओं को खारिज किया और बताया कि हमारे देश में हाइड्रोकार्बन के नए भंडार मिले हैं. दक्षिणी फार्स स्टेट में 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से ज्यादा गैस के भंडारों का पता चला है. इन भंडारों से 5.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट भंडार निकाले जा सकते हैं. गैस के नए भंडार ईरान की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते हैं. सही समय आने पर इन भंडारों से जुड़ी और जानकारी शेयर करेंगे.

गैस के नए भंडारों से क्या फायदा होगा?

पाकनेजाद ने बताया कि अल्लाह ईरान पर मेहरबान है. सहयोगी देशों की मदद और लगातार प्रयास करने के बाद देश ने हाइड्रोकार्बन के भंडारों का खजाना ढूंढ निकाला है, जो देश के ऊर्जा भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगा. इतना ही नहीं गैस के नए भंडार मिले भी तब है, जब अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की. अमेरिका के अलावा ईरान कई देशों के आर्थिक प्रतिबंधों को झेल रहा है, लेकिन अब गैस के नए भंडार देश की अर्थव्यवस्था, एनर्जी सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ईरान की पहुंच को प्रभावित करेंगे, जिससे फायदा देश का ही होगा.

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ईरान-अमेरिका की जंग कब से जारी है?

बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से जंग चल रही है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे, लेकिन ईरान अपनी जिद पर अड़ा है और उसका कहना है कि वह यूरेनियम का संवर्धन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए करता है. लेकिन अमेरिका नहीं मान रहा, इसलिए अमेरिका ने इजरायल संग मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया. ईरान ने पलटवार करते हुए मिडिल ईस्ट में अरब देशों में बने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले किए. दोनों देश अब तक एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं.

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