मिडिल ईस्ट में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. इस बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वो अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं कर रहा है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक दोनों देशों के बीच कोई नेगोशिएशन नहीं हुआ है और ऐसी खबरें गलत हैं. बघाई ने बताया कि कुछ 'मित्र देशों'के जरिए अमेरिका की ओर से बातचीत के संदेश जरूर पहुंचे हैं, लेकिन ईरान ने उन पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया है कि वो अपनी रक्षा के लिए डटकर खड़ा रहेगा, ईरान अपने सिद्धांतों और शर्तों से पीछे नहीं हटेगा. बघाई ने कहा कि जो भी देश अमेरिका से बात कर सकते हैं, उन्हें ट्रंप को ये समझाना चाहिए कि ये युद्ध गलत है.

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ट्रंप ने किया था दावा

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ बेहद अच्छी और पॉजिटिव बातचीत चल रही है. हालांकि ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि इस तरह की बातें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजारों और माहौल को प्रभावित करने के लिए कही जा रही हैं. जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संपर्क नहीं है, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है. इसके बावजूद ईरान का रुख सख्त बना हुआ है और वो युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तों पर ही बातचीत करना चाहता है.

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भारत के साथ अच्छे संबंध- ईरान

बघाई ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के साथ उनके संबंध बेहद पुराने और सम्मानजनक हैं. उन्होंने कहा कि भारत युद्ध का समर्थन करने वाले देशों में शामिल नहीं है. बघाई ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवाजाही को लेकर भारत के साथ ईरान की बातचीत जारी है. उन्होंने कहा कि कई और यूरोपीय देशों के साथ भी ईरान की चर्चा जारी है. बघाई ने कहा कि ओमान के विदेश मंत्री पिछले एक साल से मध्यस्थता कर रहे थे लेकिन अमेरिका ने ऐसा होने नहीं दिया. उन्होंने पाकिस्तान के बारे में बात करते हुए कहा कि ईरान और पाकिस्तान के अच्छे संबंध हैं. उन्होंने कहा कि ईरान मानता है कि पाकिस्तान की मंशा साफ है. बघाई ने पड़ोसी देशों का जिक्र करते हुए कहा कि सभी हालातों को लेकर परेशान हैं और तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान ने ये भी साफ किया है कि वह अपने रणनीतिक मुद्दों जैसे मिसाइल प्रोग्राम या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. देश के नेताओं का कहना है कि जब तक युद्ध जारी है और हमले हो रहे हैं, तब तक बातचीत का कोई सवाल ही नहीं उठता.

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