मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत ने स्पष्ट किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट रूट में युद्धपोत तैनात करने को लेकर अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं की है. विदेश मंत्रालय ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि भारत व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेज सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की थी.

मीडिया ब्रीफिंग में इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या US ने इस होर्मुट स्ट्रेट में अपने वॉरशिप भेजने के लिए भारत से संपर्क किया है और इस मुद्दे पर नई दिल्ली का क्या रुख है, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस मामले पर वाशिंगटन के साथ कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं की है.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'हम इस विषय पर कई देशों के बीच हो रही चर्चाओं से अवगत हैं, लेकिन भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय स्तर पर कोई बातचीत नहीं की है.'

ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और अन्य देश होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से प्रभावित हैं, ये देश रूट को खुला रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे. हालांकि, ट्रंप ने जिन देशों का नाम लिया, उनमें से किसी ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी.

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ट्रंप ने सोमवार को भी कहा कि जापान 95 फीसदी, चीन 90 फीसदी, दक्षिण कोरिया 35 फीसदी तेल होर्मुज के जरिए हासिल करते हैं. इन्हें आगे आकर हमारी मदद करनी चाहिए. साथ ही कहा कि कई देश होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत भेजने को लेकर ‘उत्साही’ नहीं हैं.