हॉर्मुज जलडमरूमध्य का नाम सुनते ही प्राचीनता की सुगंध आती है. इसका नाम सुनकर अक्सर लोगों को अटपटा मसहूस होता है. ऐसा लगता है कि ये संकरा समुद्री रास्ता किसी पौराणिक ग्रंथ से निकला हो, ना कि किसी आधुनिक शिपिंग रूट से निकला हो. वैश्विक तेल व्यापार का यह संकरा समुद्री द्वार ईरान और ओमान के बीच स्थित है, लेकिन इसका उद्गम स्थल एक समृद्ध बंदरगाह शहर है जो सदियों पहले फारसी सभ्यता का केंद्र था.

कैसे हुआ जलडमरूमध्य का नामकरण?


मध्यकालीन यात्रियों ने इस शहर का वर्णन चमत्कारपूर्ण ढंग से किया था, जहां भारत, फारस और अरब के व्यापारी मसालों, रेशम और कीमती वस्तुओं के लेन-देन के लिए आते थे. 13वीं से 16वीं शताब्दी तक यह क्षेत्र का सबसे धनी व्यापारिक केंद्र रहा, और धीरे-धीरे इसी शहर के नाम पर जलडमरूमध्य का नामकरण हुआ.

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हॉर्मुज शहर की कहानी

आज के ईरान के दक्षिणी तट पर बसा यह शहर सुरक्षा कारणों से बाद में निकटवर्ती द्वीप पर स्थानांतरित हो गया. इतिहासकारों के अनुसार, 'हॉर्मुज' नाम का मूल मध्य फारसी शब्द 'हॉर्मोज' या जोरोस्ट्रियन धर्म के सर्वोच्च देवता 'अहुरा मज़्दा' से जुड़ा है, जो प्राचीन फारसी विश्वासों में बुद्धि और प्रकाश का प्रतीक था. इस्लाम के सातवीं शताब्दी में आगमन से पहले जोरोस्ट्रियनिज्म फारस की प्रमुख धर्म था, और इसी दिव्य नाम ने स्थान नामों में प्रवेश किया.

पुर्तगाली व्यापारियों का द्वीप पर कब्जा


यूरोपीय अभिलेखों में यह 'ओर्मुस' के रूप में दर्ज हुआ, जब 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली व्यापारियों ने द्वीप पर कब्जा किया. इस तरह एक धार्मिक शब्द व्यापार मानचित्रों और उपनिवेशी नक्शों तक पहुंचा. हॉर्मुज शहर फारसी खाड़ी के दक्षिणी छोर पर स्थित था, जो हिंद महासागर के समुद्री व्यापार को नियंत्रित करता था. पर्सेपोलिस के पत्थरों पर उकेरे गए फरावर प्रतीक इस प्राचीन आस्था की याद दिलाते हैं.

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प्राचीन व्यापार से तेल टैंकरों तक का सफर


आज जब विशाल तेल टैंकर इस जलमार्ग से गुजरते हैं, तो वे उसी प्राचीन समुद्री गलियारे का अनुसरण कर रहे होते हैं जो साम्राज्यों, बंदरगाहों और मसाला बाजारों को जोड़ता था. वैश्विक राजनीति में यह चोकपॉइंट बन चुका है, जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत समुद्री तेल का आवागमन होता है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का हालिया दावा इसकी रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है.