दुनिया में जंग का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. बीते कुछ वर्षों से कई देशों के बीच आपसी संबंध खराब होने के चलते युद्ध तक की नौबत आ गई. एक तरफ जहां अमेरिका और वेनेजुएला के बीच विवाद अब एयर स्ट्राइक तक पहुंच चुका है, वहीं मिडिल ईस्ट में अब सऊदी अरब और यूएई के बीच रिश्तों में खटास आने के बाद नौबत गोलीबारी और मरने-मारने तक पहुंच गई है. एक दशक पहले सऊदी अरब और यूएई की दोस्ती मिसाल दी जाती थी, लेकिन अब यही देश एक-दूसरे के खून के प्यासे बन गए हैं.
कंधे से कंधा मिलाकर किया था हूती विद्रोहियों का मुकाबला
एक समय था जब सऊदी अरब और यूएई ने कंधे से कंधा मिलाकर यमन के हूती विद्रोहियों का मुकाबला किया था, तब उनकी दोस्ती को अटल माना जाता था. लेकिन 2015 के संयुक्त हमले के बाद अब हालात उलट चुके हैं. ईरानी प्रभाव को रोकने के नाम पर शुरू हुई साझा साजिश अब खाड़ी के इन दो दिग्गजों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रही है. इस हफ्ते सऊदी का यूएई के हथियारों से लदे काफिले पर हमला इस दरार को साफ तौर पर जाहिर कर गया.
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दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर
2015 में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के शेख मोहम्मद बिन जायद को मिडिल ईस्ट के जोशीले जोड़ीदार कहा जाता था. दोनों ने मिलकर हूतियों को सना पर कब्जा करने से रोकने के लिए हवाई हमले शुरू किए थे. लेकिन आज सऊदी अपने दक्षिणी बॉर्डर पर एक मजबूत, एकजुट यमन चाहता है, ताकि सीमा पार हमलों का खतरा कम हो. दूसरी तरफ यूएई ने साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को समर्थन दे दिया, जो 1990 में खत्म हुए दक्षिणी यमन को फिर से जिंदा करने का सपना देख रही है. ये सीधा रियाद के सपनों पर प्रहार था.
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सऊदी ने तैनात की नौसेना
पिछले दिसंबर में UAE द्वारा सपोर्टेड ताकतों ने तेल समृद्ध इलाकों पर कब्जे के लिए हमला बोला, जिसमें सऊदी समर्थित सरकारी फौजों से सीधा भिड़ना पड़ा. फिर मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी एयरस्ट्राइक ने यूएई के लड़ाकू वाहनों को निशाना बनाया. रियाद ने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक' करार दिया, तो अबू धाबी ने अपनी ताकतें पीछे हटा लीं. लेकिन झगड़ा थमा नहीं और 2 जनवरी 2026 को सऊदी ने यमन तट पर नौसेना तैनात कर दी.
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