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बचपन में अंकल से सुनी कहानी, अब ढूंढ निकाला हिटलर का 'खजाना'

Nazi Army Panzer Tank Found: पोलैंड के इस शख्स को बचपन में उनके अंकल ने इस बारे में कहानियां सुनाई थी, तभी से वह इसकी तलाश में जुट गया था।

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Nazi Army Panzer Tank

Nazi Army Panzer Tank Found: पोलैंड में ​हिटलर का एक छिपा हुआ ‘खजाना’ मिला है। 80 साल से यह नदी में ‘जल समाधि’ लिए हुआ था, मगर अब इसे ढूंढ लिया गया है। बाजार में इसकी कीमत 1300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा मानी जा रही है।

दरअसल पोलैंड की जारना निदा नदी में से नाजी सेना का एक टैंक मिला है, जो बीते 8 दशक से पानी में डूबा हुआ था। यहां के लोगों का हमेशा से मानना था कि इस नदी ने हिटलर की सेना के 3 टैंक निगल लिए थे, अब उनके किस्से सच साबित हुए हैं।

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तिजौरी भर सकता यह टैंक

कहा जाता है कि सोवियत सेना से बचकर भागते हुए हिटलर की नाजी सेना के मंहगे वाहन जारना निदा नदी में डूब गए थे। इतिहास में रुचि रखने वाले लोग बरसों से इन कहानियों को सच मानते हुए इनकी तलाश में जुटे हुए थे। 1990 और 2003 में उन्हें कुछ सफलता भी मिली, लेकिन हमेशा यही माना गया कि अभी एक  टैंक इस नदी में अभी भी मौजूद है, जो बेहद खास है। अब तलाश में जुटे लोगों को बर्जपैंथर टैंक मिला है। यह टैंक बेहद खास है और तिजौरी भर सकता है, क्यों​कि 2 साल पहले जर्मनी में भी ऐसा ही टैंक मिला था, जो 15 मिलियन यूरो यानी करीब 1300 करोड़ रुपये में बिका था।

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अंकल से सुनी थी कहानी

इस टैंक को ढूंढ निकालने वाली फर्म कंपनी पैंजर फार्म के टेक्निकल मैनेजर माइकल केसकी ने अपने अंकल से इस टैंक के बारे में सुना था। इसके बाद ही उन्होंने इसे ढूंढ निकालने की तैयारी शुरू की थी। माइकल उस कहानी को कुछ इस तरह बयां करते हैं, ‘एक ऐसा टैंक था, जो दूसरे टैंक को खींचता था। एक बुजुर्ग शख्स ने मेरे अंकल से कहा था कि यह एक पैंथर टैंक था।’ माइकल के अंकल ने वह जगह भी बताई थी, जहां यह टैंक हो सकता था। हालांकि कुछ महीने पहले ही उन्हें इस टैंक की सटीक जगह का पता चला।

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आखिर क्यों है खास?

बर्ज पैंथर टैंक इसलिए भी खास है, क्योंकि इससे पहले सिर्फ एक ही टैंक के बारे में पता है। इस टैंक को 1943 में लॉन्च किया गया था। नाजी सेना के सामने समस्या थी कि जंग में क्षतिग्रस्त होने वाले टैंक को वापस कैसे लाया जाए, इसके लिए बर्ज पैंथर लाया गया। कहा जाता है कि यह भारी से भारी टैंक को भी खींच सकता था। कहा जाता है कि 1944 तक नाजी सेना के पास 5 ऐसे टैंक थे।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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