World Latest News: अमेरिकी अरबपति एलन मस्क फिर चर्चा में हैं। हाल ही में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हुए थे। मस्क पर आरोप था कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की जीत के लिए समर्थन जुटाया। अब जर्मनी ने कुछ दिन बाद होने वाले संघीय चुनाव में उन पर दखल देने के आरोप लगाए हैं। जर्मनी के प्रमुख समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार एलन मस्क ने हाल ही में जर्मनी की एक दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टी का समर्थन किया था।
जिसको लेकर अब जर्मनी सरकार के एक प्रवक्ता ने दावा किया है कि अमेरिकी धन कुबेर एलन मस्क चुनाव में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिमी यूरोपीय देश के दावों के बाद एलन मस्क फिर विवादों में आ गए हैं। बता दें कि जर्मनी में अगले साल फरवरी में संघीय चुनाव होने हैं। प्रवक्ता ने कहा कि मस्क को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। लेकिन विचारधारा की एक सीमा होती है।
हाल ही में एलन मस्क ने दक्षिणपंथी पार्टी AfD को समर्थन देने का ऐलान किया था। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी राय का खुलासा किया था। इस बयान को जर्मनी के Axel Springer मीडिया समूह के प्रमुख समाचार पत्र Welt am Sonntag ने जर्मन भाषा में प्रकाशित किया था। मस्क ने कहा था कि जर्मनी के लिए AfD पार्टी ही आशा की आखिरी उम्मीद है। यह पार्टी ही जर्मनी के भविष्य को उज्जवल बना सकती है। जर्मनी की आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक अखंडता और तकनीकी खोजें केवल इच्छाएं नहीं, बल्कि वास्तविकता भी हैं।
टेस्ला के CEO ने लिखा था कि उन्होंने जर्मनी में खूब निवेश किया है। इस निवेश की वजह से ही उनको ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार मिला है। AfD पार्टी को चरमपंथी विचारधाराओं के रूप में चित्रित करना बिल्कुल भी सही नहीं है। पार्टी की नेता एलिस वीडेल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि उनका श्रीलंका में समलैंगिक साथी है। क्या आपको ऐसा कहना हिटलर जैसा नहीं लगता? मस्क की टिप्पणी के बाद अब जर्मन मीडिया में नई बहस शुरू हो गई है।
पहले भी ऐसी टिप्पणियां कर चुके मस्क
बता दें कि एलन मस्क पहले भी अपनी टिप्पणियों के लिए चर्चा में रह चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की दावेदारी का खुला समर्थन किया था। ट्रंप की आर्थिक मदद करने की बातें भी सामने आई थीं। जीत के बाद कई विश्लेषक सामने आए थे। जिन्होंने ट्रंप की जीत में मस्क के योगदान का जिक्र किया था। बता दें कि हाल ही में जर्मनी में चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिर गई थी। जिसके बाद यहां पर 23 फरवरी को वोटिंग होनी है।