फ्रांस में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर फ्रांस और यूरोप की इमिग्रेशन को लेकर बनाई गई नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा- ”फ्रांस जल रहा है! एक बिल्कुल अलग दुनिया से आए लोगों के इमिग्रेशन और उनके दिलों में भरी नफरत ने उस देश को तहस-नहस कर दिया है, जो कभी महान था. अपने बॉर्डर बंद करो और नियंत्रण हासिल करो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए.”
ट्रंप का इमिग्रेशन नीतियों पर निशाना
ट्रंप का इशारा फ्रांस में बड़ी संख्या में मौजूद उन लोगों की तरफ है जो वहां पिछले कई सालों के दौरान अप्रवासियों के तौर पर पहुंचे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग अफ्रीकी और युद्ध ग्रस्त देशों से समुद्र के रास्ते फ्रांस पहुंचते हैं. ट्रंप से पहले उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस हिंसा के लिए यूरोप और फ्रांस की उदारवादी नीतियों को दोषी ठहरा चुके हैं.
स्कूलों से महंगाई तक पहुंचा आंदोलन
फ्रांस में पिछले कई हफ्तों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं. सबसे पहले इसकी शुरुआत स्कूल सुधारने के नाम पर हुई थी. हजारों की संख्या में स्कूली छात्र , फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत अलग अलग शहरों में सड़कों पर उतरे, लेकिन फिर देखते ही देखते, महंगाई का मुद्दा भी इसमें शामिल हो गया और इन प्रदर्शनों ने हिंसा और आगजनी का रूप ले लिया.
अमेरिका के निशाने पर यूरोप का उदारवाद
अमेरिका के दोनों सबसे बड़े नेता बार बार कह चुके हैं कि ये हिंसा पश्चिमी देशों के उदारवाद और मल्टी कल्चरलिज्म को बढ़ावा देने का नतीजा है. लेकिन सच ये है कि इस तरह के प्रदर्शन सिर्फ फ्रांस में नहीं बल्कि दुनिया के अलग अलग देशों में हो रहे हैं. यूरोप की बात करें तो फ्रांस के बाद स्पेन, पुर्तगाल और इटली और बेल्जियम में भी ऐसे ही प्रदर्शन हुए., इसके अलावा ट्युनिशिया, अलबानिया और अरेंजेटिना में भी ऐसे प्रदर्शन हो रहे हैं और सब जगह वजह एक ही है- बढ़ती हुई महंगाई.
ऐतिहासिक इमारतों में आग
सबसे ज्यादा हिंसा फ्रांस के प्रदर्शनों में हुई है, फ्रांस की सरकार के मुताबिक प्रदर्शन में 5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया जबकि अलग अलग लेबर यूनियन्स के मुताबिक ये संख्या 8 लाख से ज्यादा है. फ्रांस में हुई ताजा हिंसा के दौरान राजधानी पेरिस में मौजूद कई एतिहासिक इमारतों में भी आग लगा दी गई. फ्रांस के लिमोज शहर में तो 143 साल पुराने टाउन हॉल को आग के हवाले कर दिया गया. फिलहाल पुलिस हिंसा फैलाने के आरोप में 1800 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और नुकसान का आंकलन किया जा रहा है.