पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर भारी झड़पें और हवाई हमले हो रहे हैं. पाकिस्तान ने 'ओपन वॉर' की घोषणा कर दी है, जबकि अफगान तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जे का दावा किया है. इन्हीं हमलों से चर्चा में आई 132 साल पुरानी लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी डुरंड लाइन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारित करती है. यह 12 नवंबर 1893 को ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच समझौते से खींची गई थी.

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क्या है डूरंड लाइन का मकसद?

डूरंड लाइन 'ग्रेट गेम' का हिस्सा था, जहां ब्रिटेन रूस के प्रभाव को रोकने के लिए अफगानिस्तान को बफर जोन बनाना चाहता था. अमीर अब्दुर रहमान ने शुरुआत में कहा था. 'यह पहली बार है कि अफगानिस्तान की स्पष्ट सीमा निर्धारित की गई है, जिससे भविष्य में गलतफहमी पैदा नहीं होगी' लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ब्रिटिश दबाव में हुआ, जिसमें अफगानिस्तान ने बड़े इलाकों पर अपना दावा छोड़ दिया. 1947 में भारत के बंटवारे के बाद यह लाइन पाकिस्तान अफगानिस्तान की सीमा बन गई. पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है और 2017 में कांटेदार तार लगाए.

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अफगानिस्तान ने कभी नहीं दी मान्यता

अफगानिस्तान ने कभी इसे पूरी तरह मान्यता नहीं दी, क्योंकि यह पश्तून और बलूच कबीलों को दो हिस्सों में बांटती है. एक तरफ अफगानिस्तान, दूसरी तरफ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान. अफगानों का कहना है कि यह समझौता ब्रिटिश दबाव में हुआ और जबरन थोपा गया. डुरंड लाइन पश्चिम में ईरान की सीमा से शुरू होकर पूर्व में चीन की सीमा तक फैली हुई है. यह रेखा पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तानों और दुर्गम क्षेत्रों से गुजरती है, जिसकी वजह से इसकी निगरानी हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है.