दुनिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं. इस बार मामला दो मुस्लिम देशों- पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का है. हाल ही में दोनों देशों के बीच सीमा पर भारी तनाव देखने को मिला, जो अब खुली जंग में बदल चुका है. दोनों देश एक-दूसरे को इसका जिम्समेदार ठहरा रहे हैं, लेकिन सवाल ये है कि आखिर इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच जंग क्यों भड़क गई? चलिए इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं
जंग की शुरुआत कैसे हुई?
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की धरती से आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पाकिस्तान में लगातार हमले कर रहे हैं. इन हमलों में पाकिस्तानी सैनिकों और आम नागरिकों की जान गई है. पाकिस्तान का कहना है कि उसने कई बार अफगान सरकार से इन आतंकियों पर कार्रवाई करने को कहा, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए. पाकिस्तान का दावा है कि ये हमले सिर्फ आतंकी ठिकानों पर किए गए, ना कि आम नागरिकों पर.
अफगानिस्तान का क्या कहना है?
अफगानिस्तान की तरफ से इन हमलों का कड़ा विरोध किया गया है. वहां की तालिबान सरकार का कहना है कि पाकिस्तान ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है. अफगान सरकार का दावा है कि उसकी जमीन से किसी भी तरह की आतंकी गतिविधियों को इजाजत नहीं दी जाती. अफगानिस्तान ने ये भी कहा कि पाकिस्तानी हमलों में निर्दोष लोग, महिलाएं और बच्चे भी मारे गए हैं. इसी के जवाब में अफगान लड़ाकों ने भी सीमा पर पाकिस्तान की चौकियों को निशाना बनाया.
डूरंड लाइन बना विवाद की जड़
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा को डूरंड लाइन कहा जाता है. ये सीमा ब्रिटिश शासन के समय तय की गई थी. अफगानिस्तान आज भी इस सीमा को पूरी तरह मान्यता नहीं देता. इसी वजह से सीमा पर अक्सर झड़पें होती रहती हैं. इस सीमा क्षेत्र में दोनों देशों के कबीले रहते हैं, जिनका एक-दूसरे के यहां आना-जाना बना रहता है. इसी का फायदा कई बार आतंकी संगठन उठाते हैं. साल 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन उल्टा TTP के हमले बढ़ गए. इससे पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते और खराब हो गए. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों ने संयम नहीं बरता, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. दोनों देशों के बीच युद्ध का असर सिर्फ इन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर असर पड़ेगा.