अमेरिका ने बिल पास करके यूक्रेन से जंग लड़ रहे रूस पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की है और रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी की है. लेकिन अमेरिका ने रूस के साथ अपने व्यापार और परमाणु समझौते बरकरार रखे हैं. रूस और उसके बिजनेस पार्टनर देशों पर प्रतिबंध लगाएंगे और खुद रूस से यूरेनियम खरीदेंगे, यानी वे खुद प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहेंगे. दूसरों पर प्रतिबंध लगाएंगे लेकिन वे प्रतिबंध खुद पर लागू नहीं होंगे. अब इसे दादागिरी कहा जाए या रणनीति कि खुद से संबंध बने रहेंगे, लेकिन दूसरों के खराब करेंगे.

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अमेरिका की रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की योजना

बता दें कि अमेरिका चाहता है कि रूस पर यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए आर्थिक दबाव बने, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि रूस तेल व्यापार करके पैसा जुटाकर यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ने के लिए हथियार बना रहा है. इसलिए वे चाहते हैं कि कोई रूस से कच्चा तेल न खरीदे, ताकि उसे यूक्रेन युद्ध के लिए पैसा न मिले. इसलिए वे रूस पर प्रतिबंध लगाकर आर्थिक दबाव बनाना चाहते हैं. साथ ही तेल-गैस खरीदने वालों पर टैरिफ लगाकर दोहरा आर्थिक दबाव बनाना चाहते हैं, ताकि रूस पर आर्थिक दबाव बने और वह यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की शुरुआत करें.

अमेरिका ने पास किया लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026

वहीं अमेरिका जब दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाता है तो नियम लचीले रहे जाते हैं और वे खुद अमेरिका पर लागू नहीं होते हैं, क्योंकि प्रतिबंधों को लेकर जारी बिल या प्रस्ताव में अमेरिका के लिए परमाणु सहयोग और रूस से यूरेनियम का आयात करने के रास्ते जरूर होते हैं. बीते दिन लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पारित कर दिया है, जिस पर राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर होते ही रूस पर प्रतिबंध लग जाएंगे और उससे तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी राष्ट्रपति ट्रंप को मिल जाएगा, जिससे देश नाराज हैं.

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नए प्रतिबंधों के दायरे में अमेरिका खुद नहीं आएगा

बता दें कि अमेरिका ने जो बिल पास किया है, उसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से यूरेनियम आयात पर मौजूदा प्रतिबंधों को लागू करना होगा, जिसमें रोसाटॉम स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉर्पोरेशन और उसकी सहायक कंपनियों के द्वारा सप्लाई किया गया यूरेनियम भी शामिल है. लेकिन प्रतिबंध अमेरिका-रूस नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों के तहत किए गए प्रावधानों पर लागू नहीं होंगे. इसका अर्थ यह है कि बिल रूस से जुड़े हर परमाणु लेनदेन पर पूर्णतः रोक नहीं लगाता है. बल्कि मौजूदा परमाणु ईंधन व्यवस्था पर नए प्रतिबंध लगाता है, जिन्हें पहले ही कुछ नियमों के साथ छूट है.

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