Iran Processed Uranium: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की योजना अब ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने की है। ईरान के 440 किलो संवर्धित यूरेनियम को जब्त करके ले जाने की है। इसके लिए अमेरिका को ईरान के 21 युद्धपोतों, 3500 मरीज कमांडो और 50000 सैनिकों ने घेरा हुआ है। अंतिम प्रहार के लिए ट्रंप के इशारे का इंतजार है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ट्रंप ईरान के यूरेनियन को जब्त नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ईरान की भौगोलिक स्थिति के कारण यूरेनियम को ढूंढना मुश्किल है।
ईरान में सीक्रेट बंकरों में छिपाया यूरेनियम
विशेषज्ञ कहते हैं कि ईरान ने सीक्रेट बंकरों में कई सौ फीट की गहराई में ऑक्सीजन के सिलेंडर जैसे मेटर के कंटेनरों में यूरेनियम को छिपाया है। करीब 60 प्रतिशत यानी 440 किलो संवर्धित यूरेनियम से 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। इस यूरेनियम को नष्ट करने के लिए पहले अमेरिकी सेना को सीक्रेट बंकरों को तलाशना होगा। फिर यूरेनियम से भरे मेटल के कंटेनरों को देश से बाहर ले जाना होगा। इस दौरान अगर किसी भी तरह का हमला हो गया तो वैश्विक सुरक्षा को खतरा होगा।
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अमेरिका को सीक्रेट बंकरों की जानकारी है
अमेरिका के खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने दावा किया था कि उन्हें ईरान के सीक्रेट बंकरों का पता है, जहां ईरान ने 440 किलो यूरेनियम छिपाया है, लेकिन उनका मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर अमेरिका ईरान के यूरेनियम को कब्जे में लेगा तो यह मिशन बेहद खतरनाक होगा। मिशन को पूरा करने में एक नहीं 3-3 खतरे हैं। यूरेनियम को नष्ट हो जाएगा, लेकिन उसके परिणाम अमेरिका के साथ-साथ पूरी दुनिया को भुगतने होंगे।
ईरान में जमीनी हमले से 3 बड़े खतरे होंगे
अमेरिका और इजरायल के लिए ईरान पर जमीनी हमला करना आसान नहीं है। क्योंकि खर्ग आइलैंड पर करीब एक लाख सैनिक ईरान ने तैनात किए गए हैं। ईरान की न्यूक्लियर साइट पर अमेरिका के सैनिकों से 2 से 3 गुना ज्यादा सैनिक तैनात होंगे। सरप्राइज अटैक भी ईरान की सेना कर सकती है, जिससे अमेरिकी के सैनिकों को बंधक बनाया जा सकता है। न्यूक्लियर प्लांट पर हमले के दौरान न्यूक्लियर रेडिएशन लीक होने का खतरा है, जो अरब देशों में विनाश का कारण बन सकता है।
होर्मुज पर कंट्रोल के लिए माइंस हटानी होंगी
अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा करने के लिए समुद्र में बिछाई गई माइन हटानी होंगी। USS ट्रिपोली ईरान के तट पर मरीन कमांडो को उतारकर ऑपरेशन चलाएगा, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के 7 द्वीप हैं, जहां भारी मात्रा में सेना तैनात है। एक पर हमला हुआ तो बाकी 6 पर तैनात सेना हमला करेगी। केशम द्वीप सबसे अहम है। अंडरग्राउंड मिसाइल बंकर, हजारों स्पीड बोट और लाखों सैनिक यहां तैनात हैं। लार्क, होर्मुज, हेंगम और अबू मूसा द्वीप पर भी 10 लाख सैनिक तैनात हैं।
अमेरिका को करीब 3 लाख सैनिकों की जरूरत
विशेषज्ञ कहते हैं कि 55000 सैनिकों के साथ ईरान पर जमीनी हमले करना संभव नहीं है। 3 लाख सैनिकों की जरूरत है। साल 2003 के इराक युद्ध और गाजा में इजरायल का ऑपरेशन इसका बड़ा उदाहरण है। समुद्र में माइन बिछी हैं और एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम तैनात हैं। सबसे बड़ा खतरा अगर खर्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो ईरान इसे आग लगा सकता है, जिससे भारी तबाही मचेगी। फिर भी अमेरिका ने ईरान को शर्तें नहीं मानने पर ईरान के तेल, गैस और परमाणु ठिकानों पर हमले की धमकी दी है।
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