अमेरिका और ईरान के बीच 2 दौर की शांति वार्ता फेल हो चुकी है। एक बार इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठे, लेकिन शर्तों पर सहमति नहीं बनी। दूसरी बार इस्लामाबाद में ही ईरान का प्रतिनिधिमंडल तो आया, लेकिन पाकिस्तान को अपनी शर्तों का प्रस्ताव सौंपकर चला गया। अमेरिका से सीधे बात करने का ऑफर ठुकरा दिया। यह देखकर राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है।

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बात करने के लिए ईरान को करना होगा फोन

वहीं अब राष्ट्रपति ट्रंप ने नया प्लान बनाते हुए ईरान को बातचीत करने का ऑफर दिया है, लेकिन इस बार उन्होंने साफ-साफ कहा है कि अगर ईरान को अब शांति वार्ता करनी है, समझौते के लिए बात करनी है तो वह फोन करे। अमेरिका के प्रतिनिधि किसी देश में उनसे बातचीत करने नही जाएंगे। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 24 घंटे में दो बार पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं और अब वे पुतिन से मिलने रूस पहुंचे हैं। दोनों में अमेरिका से समझौतो को लेकर बात हो सकती है।

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समझौता कराने के लिए अब पुतिन करेंगे पहल?

बता दें कि अमेरिका और ईरान का शांति समझौता कराने के लिए अब पुतिन पहल करेंगे। क्योंकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार को मॉस्को पहुंचे, जहां वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। इसे अहम कूटनीति बताया जा रहा है, क्योंकि रूस भी अमेरिका और ईरान में शांति समझौते के पक्ष में है। अमेरिका के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बीच अराघची ने 24 घंटे में दूसरी बार पाकिस्तान का दौरान भी किया, जहां वे असीम मुनीर से मिले।

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राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान को बात करने का न्योता

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को अब सीधे तौर पर बातचीत करने का न्योता दे दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करेगा, लेकिन अब ईरान को फोन पर बात करनी होगी। वहीं बातचीत की पहल ईरान को करनी होगी। ईरान में अब 2 तरह के लोग हैं। जिनसे समझौते को लेकर बातचीत चल रही हे, वे समझदार हैं। लेकिन दूसरा धड़ा ईरान को बर्बाद करने की कसम खाए हुए है। उम्मीद है कि ईरान समझदारी से काम लेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान को अंजाम भुगतना होगा।

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राष्ट्रपति ट्रंप ब्रिटेन-चीन और NATO से नाराज

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर देंगे। उनकी सबसे बड़ी मांग ईरान से परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक-एक चीज को खत्म करना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने NATO यानी पश्चिमी देशों के सैनिक गठबंधन पर भी गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि जब हमें जरूरत थी, नाटो काम नहीं आया, पर वक्त हमारा भी आएगा।

ब्रिटेन को लेकर ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन अपने जहाज तब भेजेगा, जब जंग खत्म हो जाएगी। खतरे में साथ देना चाहिए था, खतरा टलने के बाद दोस्ती निभाने का कोई मतलब नहीं। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन कि चीन सबसे ज्यादा बुरा हो सकता है, लेकन इस मामले में चीन ने समझदारी दिखाई।