डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते अमेरिका में व्हाइट हाउस में मुलाकात कर सकते हैं। नेतन्याहू ने ट्रंप को फोन करके अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात का समय मांगा। वहीं फोन पर हुई बातचीत में ईरान को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेदों पर भी चर्चा हुई। नेतन्याहू से फोन पर बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने अपने चिर-परिचित अंदाज में फिर बड़ा बयान दिया। उन्होंने नेतन्याहू को तेवर दिखाते हुए एक बार फिर खुद को बॉस बताया।
‘एक ही हमले में सबको मार सकते थे’, खामेनेई के जनाजे में जुटे ईरानी नेताओं को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
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ट्रंप ने बताया कौन है असली बॉस?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इजरायल और अमेरिका के रिश्ते काफी अच्छे हैं। उनके और नेतन्याहू के संबंध भी बहुत अच्छे हैं। नेतन्याहू अच्छी तरह जानते हैं कि बॉस कौन है। वहीं इजरायल की ओर से भी नेतन्याहू की ट्रंप से फोन पर हुई बातचीत की आधिकारिक पुष्टि की गई है। इजरायल की ओर से बताया गया है कि नेतन्याहू और ट्रंप की फोन पर लंबी बात हुई। नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात का समय मांगा और कहा कि अमेरिका वैश्विक स्वतंत्रता का रक्षक और गारंटर है। इजरायल दोनों देशों के करीबी रिश्तों को महत्व देता है और देता रहेगा।
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नाटो शिखर सम्मेलन में जाएंगे ट्रंप
सूत्रों के अनुसार, अगर ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात होती है तो 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ने के बाद पहली बार दोनों नेता आमने-सामने होंगे। लेकिन अगले हफ्ते बैठक संभव नहीं। क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप को 7 और 8 जुलाई को NATO शिखर सम्मेलन के लिए तुर्की जाना है तो वहां से लौटने के बाद ही मुलाकात संभव है। फिलहाल दोनों में मतभेद हैं और फोन पर बातचीत में ट्रंप ने लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर नाराजगी भी जताई थी। ट्रंप चाहते हैं कि इजरायल लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई को बंद करके समझौता करे।
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ट्रंप के करीबी नेतन्याहू के विरोधी
ट्रंप के करीबी अब नेतन्याहू को लेकर संशय में हैं। ट्रंप के करीबी सलाहकारों का मानना है कि नेतन्याहू कुछ मामलों में गलत हैं। इजरायल ने लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखी है, जबकि ट्रंप ने उन्हें रोका था और लेबनान से समझौता करने का कहा था, लेकिन नेतन्याहू नहीं माने। ट्रंप ने लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर नेतन्याहू की आलोचना भी की थी। उन्होंने नेतन्याहू को पागल कहा और अहसान न मानने का आरोप लगाया। इसलिए नेतन्याहू की आपत्ति के बावजूद ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर (युद्धविराम) को बढ़ाने और परमाणु बातचीत शुरू करने के लिए मेमोरेंडम साइन किया।
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