मिडल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के हालातों के बीच जहां एक तरफ बारूद की गंध है. वहीं दूसरी तरफ इंसानियत की एक खूबसूरत कहानी सामने आई है. चीन के जिलिन प्रांत के रहने वाले लियू यिवेन ने अपनी सूझबूझ से समंदर में फंसे सैकड़ों नाविकों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है. लियू ने एक साधारण समुद्री रेडियो (VHF) को "फैमिली वॉयस स्टेशन" में बदल दिया है. जिससे बीच समंदर फंसे नाविक अपने परिवारों तक सलामती का संदेश पहुंचा पा रहे हैं. दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार. इस पहल ने संचार के सीमित साधनों के बावजूद परिवारों को जोड़ने का काम किया है.
युद्ध की आहट और होर्मुज स्ट्रेट में फंसी जिंदगी
लियू यिवेन एक सिंगापुर के कमर्शियल जहाज पर सेकंड ऑफिसर के रूप में तैनात हैं. उनका जहाज संयुक्त अरब अमीरात के खोर फक्कन बंदरगाह के पास लंगर डाले खड़ा है. असल में. 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान शुरू होने के बाद स्थिति बिगड़ गई है. सुरक्षा कारणों से लियू के जहाज समेत सैकड़ों जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट में रोक दिया गया है. इस इलाके में टेलीकम्युनिकेशन सिग्नल पूरी तरह ठप हैं. जिससे नाविकों का अपने घर-परिवार से संपर्क टूट गया है. लियू किस्मत वाले हैं कि उनका जहाज किनारे के करीब है. जहाँ इंटरनेट कभी-कभी काम कर जाता है.
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एक रेडियो कॉल ने बदली सैकड़ों नाविकों की दुनिया
मार्च की शुरुआत में लियू ने रेडियो पर एक चीनी नाविक की आवाज सुनी. जो बड़ी बेबसी से पूछ रहा था कि क्या किसी के पास इंटरनेट है? वह नाविक अपने परिवार से बात न कर पाने के कारण बहुत परेशान था. लियू ने महसूस किया कि जैसे उनका अपना परिवार सोशल मीडिया पर उनके लिए चिंतित रहता है. वैसे ही उस नाविक का परिवार भी बेचैन होगा. लियू ने तुरंत उस नाविक की मदद की और उसकी पत्नी के सोशल मीडिया अकाउंट से संपर्क साधा. करीब दस मिनट बाद जब पत्नी का वॉयस मैसेज आया. तो लियू ने अपना फोन रेडियो के पास रख दिया ताकि वह नाविक अपनी पत्नी की आवाज सुन सके.
तकनीक और जज्बे का अनोखा मेल
नाविकों के लिए यह वॉयस स्टेशन किसी वरदान से कम नहीं है. लियू अब एक पुल का काम कर रहे हैं. वह नाविकों की आवाज अपने फोन पर रिकॉर्ड करते हैं और उसे उनके परिवारों को भेज देते हैं. फिर वहां से आने वाले संदेशों को रेडियो के जरिए नाविकों को सुनाते हैं. इस छोटी सी कोशिश ने समंदर की लहरों के बीच फंसे लोगों के डर को कम कर दिया है. जहाँ मिडल ईस्ट में तनाव की खबरें दुनिया को डरा रही हैं. वहीं लियू यिवेन की यह कहानी सिखाती है कि मुश्किल वक्त में एक छोटा सा विचार भी बड़ी मानवीय सेवा बन सकता है.