China Organ Harvesting Survivor Cheng Pei Ming: चीन की जेलों में कैदियों की ऑर्गन हार्वेस्टिंग का किस्सा किसी से छिपा नहीं है। हालांकि इस हैवानियत का शिकार बनने वाले कैदियों की अक्सर जान चली जाती है। जो कैदी इस यातना से बचते हैं वो चीन की जेलों में घुट-घुट कर दम तोड़ देते हैं। हालांकि आज हम आपको एक ऐसे कैदी की कहानी सुनाने जा रहे हैं जो ऑर्गन हार्वेस्टिंग के बावजूद जेल से बच निकला।
चेंग की कहानी
ये कहानी है चेंग पेई मिंग की। जेल में सजा काट रहे चेंग को जबरन बेहोश करके उनके शरीर के कई हिस्से निकाल लिए गए और उन्हें अधमरी हालत में छोड़ दिया गया। इसके बावजूद जब चेंग बच गए तो दोबारा उनका ऑपरेशन करके बचे हुए अंगों को निकालने की कोशिश की गई। चेंग किसी तरह अस्पताल से भाग निकले और थाईलैंड के रास्ते अमेरिका पहुंच गए। अमेरिका में एक भाषण के दौरान चेंग ने अपनी जिंदगी का दर्दनाक किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप जाएगी।
यह भी पढ़ें- बहादुर पायलट! जान देकर 400 जिंदगियां बचाई, हेलीकॉप्टर होटल की छत से टकराया और धू-धू कर जला
चेंग को मिली 8 साल की सजा
चेंग पेई मिंग के अनुसार वो चीन के शादोंग प्रांत में स्थित गुओझुआंग गांव से ताल्लुक रखते हैं। चीन सरकार में फालुन गोंग, जो एक तरह का आध्यात्मिक अभ्यास है, उसे काफी बुरा मानती है। चेंग ने इसे लेकर चीनी सरकार का विरोध किया। चीन की पुलिस ने चेंग को गिरफ्तार कर लिया और अदालत ने उन्हें 8 साल की सजा सुना दी।
साल में 3 बार होता था ब्लड टेस्ट
चेंग का कहना है कि जेल में उन्हें जबरदस्ती साल में 3 बार ब्लड टेस्ट करवाना पड़ता था। यह ब्लड टेस्ट चेंग की सेहत पता करने के लिए नहीं बल्कि उनके ऑर्गन की हेल्थ चेक करने के लिए करवाया जाता था। चेंग के अनुसार एक रोज उन्हें अस्पताल ले जाया गया और उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। चेंग ने जब इसके लिए मना किया तो 6 गार्ड्स ने उन्हें धक्का मारकर जमीन पर गिरा दिया। फिर उन्हें बड़े से स्ट्रेचर पर लिटाया गया और उनके हाथ-पैर जंजीर से बांध दिए गए। डॉक्टरों ने चेंग को बेहोशी का इंजेक्शन दे दिया।
चेंग का ऑर्गन निकाला
नवंबर 2004 की सुबह चेंग को होश आया तो उन्होंने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर पाया। उनके पैरों के पास IV ट्यूब पड़ी थी। उनके बाएं सीने से ड्रेनेज ट्यूब निकली थी, जिसमें थोड़ा सा खून बह रहा था। चेंग की नाक में ऑक्सीजन ट्यूब डाली गई थी। साथ ही चेंग के शरीर के बाएं हिस्से पर बड़ा सा चीरा लगा था, जिसे टांकें की मदद से सिला गया था। ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट ने सीटी स्कैन करने के बाद बताया कि चेंग का बायां लिवर लोब गायब है। उनका फेफड़े का निचला लोब भी नहीं है।
चीन की जेल से भागे चेंग
अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में भाषण देते समय चेंग ने कहा कि कुछ समय बाद उन्हें फिर से अस्पताल ले जाया गया और फिर से पेपर पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। जब उन्होंने इनकार किया तो उन्हें मारकर स्ट्रेचर पर लिटा दिया। चेंग को अच्छी तरह से पता था कि अगर इस बार ऑर्गन निकाला गया तो वो जिंदा नहीं बचेंगे। चेंग के अनुसार गार्ड्स उन्हें बांधना भूल गए थे। मौका मिलते ही चेंग वहां से फरार हो गए।
थाईलैंड के रास्ते पहुंचे अमेरिका
चेंग किसी तरह चीन से भाग कर थाईलैंड पहुंचे। थाईलैंड में 5 साल बिताने के बाद चेंग को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी का दर्जा मिल गया। उसके बाद चेंग अमेरिका चले गए। चीन की जेल से भागे उन्हें 14 साल हो चुके हैं। मगर चेंग आज भी उन यातनाओं को अपने जहन से निकाल नहीं सके हैं।
यह भी पढ़ें- Hindenberg की रिपोर्ट से आज शेयर बाजार में फटेगा बम? जानें क्या कहते हैं Experts
संबंधित खबरें
चीन के तियानमेन स्क्वायर पर आंदोलन को कैसे कुचला गया? 37 साल बाद खुला राज
2 hrs agoनेपाल में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा, बाढ़ की चेतावनी जारी
6 hrs ago'नॉर्वे में कुछ तो गड़बड़ है', नोबेल प्राइज न मिलने पर छलका ट्रंप का दर्द
7 hrs agoहूती विद्रोहियों का सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हमला, 12 लोगों की मौत
7 hrs ago'प्लीज! आतंरिक मामले में दखल न दें', CJP प्रोटेस्ट पर UN को भारत की दो टूक
8 hrs agoअमेरिका में मास शूटिंग, 2 बच्चों और 1 गर्भवती महिला समेत 9 की मौत
8 hrs ago'जेलेंस्की की जगह नया राष्ट्रपति चुने यूक्रेन', डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
15 hrs agoPAK ने इंटरनेशनल कोर्ट में लुटा दिए 57 करोड़, भारत पर किया था केस
21 hrs agoफ्लाईदुबई के को-पायलट की तेल अवीव एयरपोर्ट पर विमान क्रैश करने की थी योजना
1 day ago'झूठ फैलाना बंद करो', कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने UN में PAK को फिर लताड़ा
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines