ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों का सीजफायर चल रहा है। पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच बैठक बेनतीजा रही। करीब 40 दिन चले युद्ध में अमेरिका और ईरान के सैन्य बेडे़ में बड़ी कमी हुई है। इसी बीच कनाडा ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने साफ किया है कि अब कनाडा अपने रक्षा बजट का 70% हिस्सा अमेरिकी कंपनियों को नहीं भेजेगा। इसे ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था। इसमें ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत कई बड़े नेता और सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। इसके बाद विवाद ने युद्ध का रूप ले लिया। युद्ध में ईरान, अमेरिका और इजरायल के हथियारों में बड़ी कमी आई। अमेरिका और इजरायल ने अपने रक्षा बजट में भी बढ़ोतरी की। अब कनाडा ने अमेरिका को आर्थिक झटका दिया है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बयान के अनुसार, कनाडा अपने रक्षा खर्च का 70% अमेरिकी कंपनियों को नहीं भेजेगा, जिससे कनाडा के रक्षा उद्योग को मजबूत करने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिश है।
बता दें कि कई देश अमेरिकी सेना को पैसे भेजते हैं, खासकर जो देश अमेरिका के साथ रक्षा समझौते करते हैं या अमेरिकी हथियार खरीदते हैं। जैसे अमेरिका ने यूक्रेन को अब तक लगभग 175 अरब डॉलर की सहायता दी है, जिसमें से अधिकांश अमेरिकी कंपनियों को हथियार और सेवाएं प्रदान करने के लिए है। इज़राइल अमेरिका से सबसे अधिक विदेशी सैन्य सहायता प्राप्त करता है, जो 2019-2023 के बीच 16.5 अरब डॉलर है। मिस्र भी अमेरिका से बड़ी मात्रा में सैन्य सहायता प्राप्त करता है, जो 2019-2023 के बीच 6.3 अरब डॉलर है।
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कनाडा अपने रक्षा खर्च पर दोबारा विचार कर रहा है ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके। सालों से कनाडा का रक्षा बजट अमेरिकी हथियार और प्रणालियों को खरीदने में खर्च होता रहा है, जिससे कनाडा की अपनी सैन्य क्षमता कमजोर हुई है। अब कनाडा घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है, जिससे रोजगार बढ़ें और उसकी अपनी सैन्य क्षमता विकसित हो।
अमेरिकी सैनिकों के लिए भुगतान करने वाले देशों में जापान और दक्षिण कोरिया प्रमुख हैं। जापान सालाना लगभग 2 बिलियन डॉलर का योगदान देता है, जिसमें उपयोगिता, स्थानीय कर्मचारियों के वेतन और बुनियादी ढांचे की लागत शामिल है। दक्षिण कोरिया रक्षा समझौते के तहत हर साल $1 बिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि देता है।यह व्यवस्था अमेरिकी सैन्य अड्डों के रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है और अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है। क्या आप जानना चाहते हैं कि और कौन से देश अमेरिकी सैनिकों के लिए भुगतान करते हैं?
जर्मनी भी अमेरिकी सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक समर्थन प्रदान करता है। जर्मनी सालाना एक बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करता है, जिसमें बुनियादी ढांचे, हवाई अड्डे और उपयोगिता के रखरखाव शामिल हैं। इसके अलावा, जर्मनी टैक्स छूट और जमीन तक पहुंच भी देता है, जिससे अमेरिकी सेना की लागत कम हो जाती है।
अमेरिका से हथियार खरीदने वाले देशों में सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देश प्रमुख हैं। यह खरीद अमेरिकी रक्षा उद्योग को मजबूत करती है। नाटो के तहत सदस्य देश अपनी आर्थिक क्षमता के आधार पर साझा बजट में योगदान देते हैं, जिससे सामूहिक रक्षा का भार साझा होता है। अमेरिका और जर्मनी दोनों ही नाटो की परिचालन लागत में लगभग 16% का योगदान देते हैं।
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