इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर बात की है. इस दौरान नेतन्याहू ने कहा, दोनों नेता हमेशा एक दूसरे की बात को पूरी तरह रसे स्वीकार नहीं करते हैं क्योंकि वो स्वतंत्र देशों के नेता हैं. हालांकि, अभी ये साफ नहीं है कि उन्होंने ये बातें किस संदर्भ में कही हैं.
बता दें कि बेंजामिन नेतन्याहू इंटरनेशनल पॉलिसी सब्मिटी में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वह सब कुछ नहीं करते हैं जो मैं चाहता हूं और न ही मैं वह सब कुछ करता हूं जो वो चाहते हैं. हम आजाद और गर्व करने वाले देशों के नेता हैं, कभी-कभी हमारी राय एक दूसरे से अलग भी होती है.
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इजरायली पीएम का ये बयान हालिया घटनाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इजरायल हमास, हिज्बुल्लाह और ईरान समर्थित समूहों के साथ सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. अमेरिका इन मुद्दों पर इजरायल का समर्थन करता आया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन हमेशा इजरायल की हर मांग को तुरंत स्वीकार नहीं करता. इसी तरह इजरायल भी अमेरिकी हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां तय करता है.
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ईरान और अमेरिका के बीच चली 18 घंटे तक बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर ईरान की तरफ से बड़ी जानकारी सामने आई है. ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के बीच 18 घंटे तक बातचीत चली. इस बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. अब आगे की बातचीत के लिए टेक्निकल टीमें काम करेंगी. इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान ने बीच में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है.
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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कर दिया कि इस दौर में बातचीत करने वाले दल यानी नेगोशिएटिंग डेलिगेशन का काम फिलहाल खत्म हो गया है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सब कुछ रुक गया है. टेक्निकल टीमें यानी जो विशेषज्ञ लोग हैं, वो अगले दिन भी अपना काम जारी रखेंगे. मतलब बातचीत का एक चरण पूरा हुआ है, लेकिन काम अभी बाकी है.
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कतर और पाकिस्तान ने निभाया मध्यस्थ रोल
इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ यानी बीच का रोल निभाया है. ये दोनों देश इस बातचीत में बिचौलिए की तरह काम कर रहे हैं. अब इन दोनों मध्यस्थों की तरफ से एक लिखित दस्तावेज जारी किया जाएगा. इस दस्तावेज में उन सभी बातों की रूपरेखा होगी, जिन पर 18 घंटे की बातचीत के दौरान सहमति बनी है. यानी जो भी बातें तय हुई हैं, उन्हें एक कागज पर लिखकर पेश किया जाएगा. इसे दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति का दस्तावेज माना जाएगा.
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ईरान की दो बड़ी मांगे
ईरानी प्रवक्ता ने बताया कि इस दस्तावेज से अलग तीन अहम मुद्दे हैं, जिनमें से दो बेहद जरूरी हैं. पहला मुद्दा ये है कि ईरान को अपना तेल बेचने के लिए जरूरी परमिट मिलना चाहिए. यानी ईरान चाहता है कि उसके तेल की बिक्री पर जो पाबंदियां हैं, वो हटाई जाएं और उसे खुलेआम अपना तेल दूसरे देशों को बेचने की इजाजत दी जाए.
दूसरा मुद्दा ईरान के जमा किए गए पैसों से जुड़ा है. ईरान के अरबों डॉलर दूसरे देशों में फंसे हुए हैं, जिन्हें फ्रोजन एसेट्स कहा जाता है. ये वो पैसा है जो अमेरिकी पाबंदियों की वजह से ईरान इस्तेमाल नहीं कर पा रहा. ईरान चाहता है कि ये पैसा उसे वापस मिले. ईरानी प्रवक्ता ने साफ कहा कि ये दो मुद्दे बहुत अहम हैं और इनका हल निकलना जरूरी है.