ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की टेंशन के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अमेरिका की पाबंदियों को नजरअंदाज करके रूस से कच्चे तेल की खरीद भारत जारी रहेगा। केंद्र सरकार के हाई लेवल के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट की टेंशन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने समुद्र में फंसा जहाजों पर लदा रूस का कच्चा तेल खरीदने की छूट भारत को दी थी, जिसकी अवधि खत्म हो गई और अमेरिका ने खरीद पर पाबंदी लगा दी है।
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टैरिफ के बावजूद बंद नहीं की थी खरीद
अमेरिका ने पहले भी रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। तब भी भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद नहीं की थी, बल्कि कम कर दी थी, लेकिन खरीद में कटौती करने के दूसरे कारण थे। अब भी रूस से तेल खरीद भारत जारी रखेगा, बेशक कम तेल खरीदा जाए। क्योंकि भारत की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा आश्यकताओं को पूरा करना है। पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी को पूरा करना है। न की यह सोचना कि अमेरिका पाबंदियां लगाएगा तो क्या करेंगे?
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अरब देशों से ज्यादा तेल खरीदा जाएगा
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 64 डॉलर प्रति बैरल तक आ चुके थी। रूस से भारत 60 डालर प्रति बैरल कच्चा तेल खरीदता था। अरब देशों से 64 का रेट मिलता है और रूस से 60 का रेट मिलता है, लेकिन रूस से कच्चा तेल लाने में खर्च ज्यादा होता है। इसलिए अरब देशों से ज्यादा तेल मंगाया जाएगा, क्योंकि वह जल्दी पहुंच जाता है। फिर भी रूस से तेल खरीद जारी रहेगी। क्योंकि वह भारत का बड़ा बिजनेस पार्टनर है और उसके साथ भारत के रणनीतिक संबंध अच्छे हैं।
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जरूरतें पूरी करने के लिए खरीदेंगे तेल
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका को पहले ही बात दिया है कि रूस से तेल की खरीद 1.4 अरब की आबादी की भलाई के लिए की जाती है। वैश्विक बाजार की स्थितियों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जाती है और की जाती रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ पर पाबंदी लगाकर उसे खत्म कर दिया है। इसलिए भी भारत को अमेरिका की पाबंदियों की परवाह नहीं है। इसलिए भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। अमेरिका को आपत्ति है तो वे समाधान खुद करें।
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रूस से 38% कच्चा तेल मंगा रहा भारत
बता दें कि भारत साल 2025 में रूस से प्रतिदिन औसतन 26 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा था, लेकिन फरवरी 2025 में कच्चे तेल की खरीद 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। मार्च में इसे बढ़ाकर 15 लाख बैरल प्रतिदिन किया गया और अब अप्रैल में 20 लाख बैरल प्रतिदिन खरीदारी जारी है, यानी रूस से भारत 38 फीसदी कच्चा तेल खरीद रहा है। वहीं चीन इस वक्त रूस से 51 फीसदी कच्चा तेल खरीद रहा है।