ट्रंप पर कम हुआ अमेरिकी जनता का भरोसा! सामने आए व्हाइट हाउस के दावों की पोल खोलते आंकड़े

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरे देशों पर टैरिफ लगा रहें और टैरिफ के जरिए खरबों डॉलर से अपनी इकोनॉमी को बढ़ाने का दावा कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी लोगों का अपने देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कम होता जा रहा है.

donald trump

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरे देशों पर टैरिफ लगा रहें और टैरिफ के जरिए खरबों डॉलर से अपनी इकोनॉमी को बढ़ाने का दावा कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी लोगों का अपने देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कम होता जा रहा है.

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न्यूज एजेंसियों AP और AFP की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स 2020-21 की कोविड महामारी के दौरान की सबसे कम रीडिंग से भी नीचे गिर गया है और मंगलवार को कुछ और आंकड़े सामने आए जिनसे पता चलता है कि देश अब मंदी की ओर बढ़ रहा है.

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मंगलवार को जारी डेटा के अनुसार, US कॉन्फ्रेंस बोर्ड का इंडेक्स जनवरी 2026 के लिए पिछले महीने के 94.2 से घटकर 84.5 हो गया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा मई 2014 के बाद से सबसे कम है और अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे में सभी अनुमानों से कम रहा है. इसका सीधा मतलब है कि अमेरिकी अपने फाइनेंशियल भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा चिंतित हैं.

इसके अलावा, अमेरिकियों की इनकम, बिजनेस की स्थिति और जॉब मार्केट के बारे में शॉर्ट-टर्म उम्मीदों का एक पैमाना 9.5 पॉइंट गिरकर 65.1 पर आ गया, जो 80 से काफी नीचे है. यह एक ऐसा संकेत है जो आने वाली मंदी की ओर इशारा करता है.

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यह लगातार 12वां महीना है जब यह रीडिंग 80 से नीचे आई है, जिससे अमेरिकी लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं, जबकि ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’, ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ और ऐसे दूसरे नारे कई मोर्चों पर उनकी कथित तौर पर संरक्षणवादी और संदिग्ध नीतियों को हवा दे रहे हैं. इसके अलावा कन्ज्यूमर्स का अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर आकलन 9.9 अंक गिरकर 113.7 पर आ गया है.

अमेरिकी कंज्यूमर्स भविष्य को लेकर भी चिंतित

कॉन्फ्रेंस बोर्ड की चीफ इकोनॉमिस्ट डाना पीटरसन ने कहा, ‘मौजूदा हालात और भविष्य की उम्मीदों को लेकर कंज्यूमर्स की चिंताएं बढ़ गईं हैं.’

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नौकरी के मौके हुए कम

जॉब मार्केट को लेकर लोगों की सोच भी बदल गई है. सर्वे में बताया गया है कि 23.9% कंज्यूमर्स ने कहा कि नौकरियां ‘बहुत ज्यादा’ है, जो दिसंबर में 27.5% से कम है. साथ ही, 20.8% कंज्यूमर्स ने कहा कि नौकरियां ‘मिलनी मुश्किल हैं’, जो 19.1% से ज्यादा है.

इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि US लेबर मार्केट ‘कम हायरिंग, कम फायरिंग’ वाली स्थिति के बीच फंसा हुआ है, क्योंकि ट्रंप के टैरिफ फैसलों को लेकर अनिश्चितता के कारण बिजनेस सतर्क हैं.

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बेरोजगारी दर 4.4%

अप्रैल में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिबरेशन डे पर टैरिफ की घोषणा के बाद पूरे साल नौकरियों में बढ़ोतरी नहीं हुई. 2025 में अर्थव्यवस्था में सिर्फ 5,84,000 नौकरियां आईं, जो 2024 में आई करीब 2 मिलियन नौकरियों से बेहद कम है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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