अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने निवेश और शेयर ट्रेडिंग को लेकर विवादों में घिर गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने करोड़ों डॉलर के शेयरों की खरीद और बिक्री की जानकारी तय समय सीमा के भीतर पब्लिक नहीं की, जिसकी वजह से उन पर 200 डॉलर का जुर्माना लगाया गया है. अमेरिकी ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स के नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति समेत बड़े सरकारी पदों पर बैठे लोगों को 1,000 डॉलर से ज्यादा की किसी भी शेयर ट्रेडिंग की जानकारी 45 दिनों के भीतर सार्वजनिक करनी होती है. लेकिन ट्रंप ऐसा करने में देरी कर गए. इससे पहले भी इसी तरह की देरी के मामलों में उन पर जुर्माना लग चुका है.

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ट्रंप ने खरीदे थे इन कंपनियों के शेयर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने फरवरी 2026 में माइक्रोसॉफ्ट और अमेजॉन के 50 लाख से 2.5 करोड़ डॉलर तक के शेयर बेचे थे. बाद में मार्च में उन्होंने इन्हीं कंपनियों के शेयर दोबारा खरीदे. इसके अलावा उन्होंने Nvidia के शेयर भी खरीदे थे. एनवीडिया के शेयर खरीदने के कुछ समय बाद कंपनी ने Meta Platforms के साथ एक बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की साझेदारी की घोषणा की थी. इसके बाद कंपनी के शेयरों में तेजी देखी गई. इसी वजह से ट्रंप की ट्रेडिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये हितों के टकराव का मामला हो सकता है.

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ट्रंप की ओर से क्या कहा गया?

हालांकि ट्रंप ऑर्गनाइजेशन की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति के निवेश फैसले कोई स्वतंत्र थर्ड पार्टी लेती है और ट्रंप या उनका परिवार सीधे तौर पर इनमें शामिल नहीं होता. ट्रंप की संपत्तियां फिलहाल उनके बच्चों के मैनेज किए जा रहे ट्रस्ट में रखी गई हैं. अमेरिका में लंबे समय से ये बहस चल रही है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं को शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग की इजाजत होनी चाहिए या नहीं. कई पूर्व राष्ट्रपति अपने निवेश को ब्लाइंड ट्रस्ट में डाल चुके हैं ताकि हितों के टकराव से बचा जा सके. लेकिन ट्रंप के मामले में विपक्ष लगातार पारदर्शिता की मांग कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने इस साल अब तक 22 करोड़ डॉलर से ज्यादा के वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया है. टेक कंपनियों और बड़े वित्तीय संस्थानों में उनके निवेश को लेकर अमेरिकी राजनीति में चर्चा तेज हो गई है.

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