पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थल को निशाना बनाने का मामला सामने आया है. लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर नरोवाल जिले के सिराज गांव में 100 से 125 साल पुराने एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिरा दिया गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर से सटी मदरसे की जमीन को बढ़ाने और कब्जा की नीयत से कट्टरपंथियों ने जानबूझकर इस प्राचीन स्थल को तोड़ा है.
हालांकि, पाकिस्तान सरकार और 'इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि यह ढांचा भारी बारिश की वजह से गिरा है.
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TLP के कट्टरपंथियों पर तोड़फोड़ का आरोप
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मिलकर एक लिखित शिकायत सौंपी है. सहोत्रा ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान से जुड़े चरमपंथियों ने मंदिर को गिराया और बाद में उसके शिखर की धातु फिटिंग, सामग्री और ईंटें तक गायब कर दीं.
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सहोत्रा के मुताबिक, मंदिर से सटी जमीन पहले एक मदरसे के लिए लीज पर दी गई थी, लेकिन किराया न चुकाने पर 29 जनवरी 2026 को सियालकोट ईटीपीबी प्रशासन ने लीज रद्द कर दी थी. लेकिन कब्जा खाली कराने का आदेश लागू नहीं किया गया.
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'मंदिर जाने से भी डर रहा हिंदू समुदाय'
नरोवाल जिला शांति समिति और पाक धर्म अस्थान हिंदू समिति के सदस्य रतन लाल ने मंदिर गिराए जाने की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि प्रशासन और ईटीपीबी की लापरवाही के चलते यह ऐतिहासिक मंदिर गिराया गया है. उन्होंने बताया कि परिसर में अवैध रूप से चल रहे मदरसे के डर से अब हिंदू समुदाय के लोग उस जगह जाने से भी कतरा रहे हैं.
सरकार का क्या है पक्ष?
ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने कहा कि रिकॉर्ड में मंदिर का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन यह ढांचा 100 से 125 साल पुराना था. उन्होंने दावा किया कि लगातार मूसलाधार बारिश के चलते यह जीर्ण-शीर्ण ढांचा गिरा है. उन्होंने यह भी कहा कि मदरसे को दी गई लीज अलग थी और मंदिर की जमीन किसी को लीज पर नहीं दी गई थी.
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(पीटीआई के इनपुट्स के साथ)
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