Aadhaar Card Holders With Eye Lens Implants: पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को ज्यादा बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए देश के कई इलाकों राशन डिपो पर आइरिस-बेस्ड ऑथेंटिकेशन शुरू किया गया है. उम्मीद है कि इस नई सुविधा से राशन बांटने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन में दिक्कत होती है.
आइरिस स्कैन के फायदे
इस पहल का मकसद बुजुर्गों, दिहाड़ी मजदूरों और ऐसे लोगों की मदद करना है जिनकी उंगलियों के निशान अक्सर उम्र, शारीरिक मेहनत या घिसाव की वजह से मैच नहीं हो पाते. अब लोग सिर्फ फ़िंगरप्रिंट पर निर्भर रहने के बजाय आइरिस स्कैन के जरिए अपनी पहचान वेरिफ़ाई कर सकते हैं.
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आंखों का ऑपरेशन करने वालों को दिक्कत मुमकिन
हालांकि इस नई व्यवस्था से जुड़ी एक जरूरी बात ये है कि जिन लोगों ने आधार कार्ड बनवाने के बाद आंखों का कोई खास ऑपरेशन करवाया है (जैसे लेंस लगवाना), उन्हें आइरिस ऑथेंटिकेशन में दिक्कत आ सकती है. ऐसे मामलों में, स्कैन आधार डेटाबेस में मौजूद बायोमेट्रिक जानकारी से मैच नहीं हो सकता है.
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परेशानी से बचने के लिए क्या उपाय करें?
चूंकि राशन बांटने की व्यवस्था सीधे आधार रिकॉर्ड से जुड़ी है, इसलिए किसी शख्स की आंखों से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में कोई बड़ा बदलाव वेरिफिकेशन के प्रॉसेस पर असर डाल सकता है. अगर आइरिस स्कैन मौजूदा आधार डेटा से मैच नहीं करता है, तो लाभार्थी को पहले आधार सिस्टम के जरिए अपनी बायोमेट्रिक जानकारी अपडेट करवानी होगी. अपडेट की गई जानकारी के अच्छी तरह रिकॉर्ड होने के बाद ही वो शख्स राशन लेने के लिए आइरिस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल कर पाएगा.
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लोगों को होगा फायदा
इस नई सुविधा से उन बहुत से लाभार्थियों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से फिंगरप्रिंट मैच न होने की समस्या से जूझ रहे थे. नागरिकों को ये सलाह भी दी गई है कि जब भी वे आंखों से जुड़ा कोई बड़ा मेडिकल प्रोसीजर करवाएं, तो अपने आधार रिकॉर्ड अपडेट करवा लें ताकि राशन या किसी और सरकारी सुविधाओं का फायदा लेने में कोई रुकावट न आए.
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