केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-भत्ते तय करने के लिए बनाए गए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की चेन्नई में हुई बैठकें पूरी हो चुकी हैं. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग के समक्ष कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स यूनियनों खास तौर पर 'चेन्नई जीपीओ पेंशनर्स फोरम' ने मांगों की एक लंबी फेहरिस्त पेश की है. कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली से लेकर न्यूनतम वेतन 68000 रुपये करने तक के अहम प्रस्ताव रखे हैं.
क्या हैं पेंशनरों की सबसे बड़ी मांगें
देश भर के पेंशनरों की तरह फोरम ने भी पुरानी पेंशन योजना को अपनी प्राथमिकता बताया और नई पेंशन व्यवस्था की जगह गारंटीड ओल्ड पेंशन लागू करने की मांग की है. साथ ही कहा है कि महंगाई को देखते हुए रिटायर्ड कर्मियों और उनके परिवार के लिए बेसिक पेंशन व फैमिली पेंशन की दरों में बड़ा इजाफा किया जाए. एकमुश्त पेंशन कम्युटेशन की वसूली से जुड़े जटिल नियमों को स्पष्ट और लचीला बनाए जाने की भी मांग की गई है. छुट्टी के नियम, भत्तों में सुधार और सेवारत और रिटायर्ड दोनों कर्मचारियों के लिए एक मजबूत सोशल सिक्युरिटी की भी मांग की है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें : 8th Pay Commission Arrears: कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! जानें नए पे कमिशन के लागू होने पर खाते में कितने महीनों का आएगा एरियर?
68000 रुपये न्यूनतम वेतन
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने यह भी प्रस्ताव रखा कि वेतन संशोधन के लिए हर 10 साल तक इंतजार करने के बजाय एक पर्मानेंट वेज रिविजन मैकेनिज्म बनाया जाए. इसके अलावा, मौजूदा पे-मैट्रिक्स के साथ रनिंग स्केल्स लागू करने और न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 68000 रुपये प्रति माह करने की भी अफील की है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें : 8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग की रूपरेखा को मिली मंजूरी, 50 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
कब तक आएगी अंतिम रिपोर्ट?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. आयोग का कार्यकाल 10 महीने पूरे कर चुका है और इसकी अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार के सामने पेश किए जाने की संभावना है. अब अगली बैठकें 16, 17 और 18 सितंबर को चंडीगढ़ में होंगी.
---विज्ञापन---