21 जून कैलेंडर में सिर्फ एक तारीख है, लेकिन वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका अलग ही महत्व है. पूरे साल में 365 से 366 दिन हैं, लेकिन साल में एक दिन ऐसा है जो पृथ्वी पर सबसे बड़ा या लंबा दिन होता है. 21 जून को दिन लगभग 13 घंटे 58 मिनट का होता है. इसे खगोल विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म संक्रांति भी कहते हैं. इस दिन को सूर्य उत्तर से दक्षिण को ओर जाता है, जिसे उत्तरायण से दक्षिणायन होना कहते हैं. इस दिन सूर्य की किरणें धरती पर सीधी पड़ती हैं और गर्मी भी अपने चरम पर होती है.

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क्या है वैज्ञानिक महत्व?


वैज्ञानिकों का कहना है कि सौरमंडल में नौ ग्रह हैं, सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं. पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करती है और परिक्रमा करने के साथ-साथ वह अपने धुरी पर घूमती भी रहती है. पृथ्वी अपने धुरी पर सीधी नहीं है बल्कि साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है. चक्कर लगाते हुए पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य के नजदीक आ जाता है और दक्षिणी गोलार्ध उससे दूर हो जाता है. इससे उत्तरी गोलार्ध पर दिन लंबे और दक्षिणी गोलार्ध पर दिन छोटे हो जाते हैं. भूमध्य सागर के उत्तर में कर्क रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी 90 डिग्री के एंगल पर पड़ती हैं. उत्तरी गोलार्ध में अमेरिका, यूरोप, और एशिया के कुछ देश हैं जो कर्क रेखा को छूते हैं. इन पर सूर्य का सीधा प्रभाव पड़ता है.

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ज्योतिष के अनुसार महत्व


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन सूर्य मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करता है, इसे कर्क संक्रांति भी कहते हैं. भारतीय कैलेंडर विक्रम संवत को दो भागों में बांटा गया है. यह उत्तरायण तथा दक्षिणायन के रूप में विभाजित है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण, देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन देवताओं का रात होता है.

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