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जानवरों का 'कुंभकर्ण' है ब्लैक-फुटेड फेरेट नेवला, 21 घंटे सोना और सिर्फ खाने के लिए जागना; 46 साल बाद आया नजर

अमेरिका के साउथ डकोटा स्थित बैडलैंड्स नेशनल पार्क में नेवले की एक दुर्लभ प्रजाति देखी गई, जिसे कभी विलुप्त मान लिया गया था. हैरानी की बात ये है कि आखिरी बार इस प्रजाति के नेवले को 1980 में देखा गया था.

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हम नेवले की जिस प्रजाति की बात कर रहे हैं, उसका नाम 'ब्लैक-फुटेड फेरेट' है. (Photo: AI)

जंगलों की लगातार घट रही सीमाएं और मौसम में बदलाव के चलते धरती कई जीव विलुप्त होने की कगार पर हैं. हालांकि दुनिया की कई सरकारें उन जीवों को बचाने की जुगत में लगी हैं, लेकिन फिर भी नतीजे बहुत हद तक पक्ष में नजर नहीं आ रहे. इस बीच अमेरिका में एक चमत्कारी घटना हुई, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह गए. अमेरिका के साउथ डकोटा स्थित बैडलैंड्स नेशनल पार्क में नेवले की एक दुर्लभ प्रजाति देखी गई, जिसे कभी विलुप्त मान लिया गया था. हैरानी की बात ये है कि आखिरी बार इस प्रजाति के नेवले को 1980 में देखा गया था.

हम नेवले की जिस प्रजाति की बात कर रहे हैं, उसका नाम ‘ब्लैक-फुटेड फेरेट’ है. नेवला परिवार का यह दुर्लभ जीव कभी पूरी तरह विलुप्त माना जाने लगा था. अब इसकी मौजूदगी और आबादी में सुधार को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

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विलुप्त घोषित हो चुकी थी यह प्रजाति

आपको बता दें कि ब्लैक-फुटेड फेरेट उत्तरी अमेरिका की सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है. कई दशक पहले इसके प्राकृतिक आवास में इनकी संख्या इतनी तेजी से घटी कि एक्सपर्ट्स ने इसे विलुप्त मान लिया था. इसके पीछे जंगलों और घास के मैदानों का नष्ट होना, बीमारियां और इनके भोजन के प्रमुख स्रोत प्रेयरी डॉग्स की संख्या में भारी गिरावट जैसे कारण जिम्मेदार थे.

दरअसल, किसान और पशुपालक अपनी जमीन और फसलों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रेयरी डॉग्स को खत्म कर रहे थे. इससे ब्लैक-फुटेड फेरेट के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया. साथ ही प्राकृतिक आवास में कमी और बीमारियों ने इनकी आबादी को और तेजी से कम कर दिया.

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आखिरी बार 1980 के दशक में आया नजर

कई वर्षों तक विलुप्त मानी जाने वाली इस प्रजाति को 1980 के दशक में दोबारा खोजा गया था. इसके बाद वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण संगठनों ने इनके संरक्षण के लिए विशेष प्रजनन और पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किए. इन कार्यक्रमों के तहत नियंत्रित वातावरण में इनकी संख्या बढ़ाने और फिर इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने पर काम किया गया. संरक्षण टीमों ने इनके भोजन के प्रमुख स्रोत प्रेयरी डॉग्स के आवास को सुरक्षित करने पर भी ध्यान दिया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्लैक फुटेड नेवला दिन में 21 घंटे सोता है और रात के समय सिर्फ शिकार करने के लिए जागता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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