अल नीनो से जुड़ी मुख्य जानकारी (5 वन-लाइनर न्यूज):

  • अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में एक बेहद शक्तिशाली अल नीनो के बनने की पुष्टि की है.
  • सैटेलाइट डेटा के मुताबिक भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र का जलस्तर असामान्य और खतरनाक रूप से ऊपर उठ रहा है.
  • समुद्र की सतह के नीचे लगातार गर्म पानी का बहुत बड़ा भंडार जमा हो रहा है, जिससे जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है.
  • अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए 11 जून को ही अल नीनो की शुरुआत की घोषणा कर दी थी.
  • इस अल नीनो के सक्रिय होने से भारत सहित वैश्विक स्तर पर सूखे और बेमौसम भारी बारिश का खतरा बढ़ गया है.

NASA Alert: नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रेलिच सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. प्रशांत महासागर में एक बहुत ही शक्तिशाली अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है, जिससे आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया के मौसम में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के एक आधुनिक सैटेलाइट ने समुद्र की सतह पर गर्मी की एक विशाल लहर को कैमरे में कैद किया है. नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रेलिच सैटेलाइट से मिले नए डेटा से पता चलता है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में पानी का स्तर असामान्य रूप से बहुत ऊपर उठ गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इस बात का साफ संकेत है कि समुद्र की सतह के नीचे बहुत बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है.

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गर्म पानी के फैलने से बढ़ रहा समुद्र का जलस्तर, अमेरिकी एजेंसी ने भी जारी किया अलर्ट

प्रशांत महासागर के कुछ खास हिस्सों में तापमान का सामान्य से कहीं अधिक हो जाना और उसके कारण समुद्र की सतह का ऊंचा उठना सीधे तौर पर अल नीनो की दस्तक को दर्शाता है. अमेरिका के महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने पहले ही 11 जून को इस अल नीनो के शुरू होने की आधिकारिक घोषणा कर दी थी. अंतरिक्ष से मिले समुद्र की सतह के ऊंचे जलस्तर के आंकड़े वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर रहे हैं कि समुद्र के भीतर कितनी भयानक गर्मी छिपी हुई है. भौतिक विज्ञान के नियम के अनुसार गर्म पानी के फैलने से ही समुद्र का जलस्तर तेजी से ऊपर की तरफ बढ़ता है.

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साल 1997 के विनाशकारी 'गॉडजिला अल नीनो' की लौटी याद, वैज्ञानिक हुए चिंतित

नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस समय पश्चिमी प्रशांत महासागर में जो परिस्थितियां बन रही हैं, वे साल 1997 में देखी गई स्थितियों से काफी मिलती-जुलती हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1997 में दुनिया ने अब तक के सबसे खतरनाक और शक्तिशाली अल नीनो का सामना किया था, जिसे विज्ञान की भाषा में 'गॉडजिला अल नीनो' का नाम दिया गया था. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार बन रहा अल नीनो लगातार और ज्यादा मजबूत होता जा रहा है. अगर यही रफ्तार रही तो यह पिछले कई दशकों की सबसे ज्यादा विनाशकारी खगोलीय घटना साबित हो सकती है.

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नासा ने सैटेलाइट डेटा से तैयार किया समुद्र का नक्शा, केल्विन वेव्स से बढ़ा खतरा

जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट से प्राप्त बेहद संवेदनशील डेटा को प्रोसेस करके समुद्र का एक थ्री-डी नक्शा भी तैयार किया है. इस खास नक्शे में 8 जून की वास्तविक स्थिति को दर्शाया गया है, जिसमें लाल रंग का हिस्सा समुद्र के अत्यधिक ऊंचे जलस्तर को दिखा रहा है. वहीं सफेद हिस्सा सामान्य और नीला हिस्सा कम जलस्तर को प्रदर्शित करता है. इसी सैटेलाइट ने कुछ समय पहले समुद्र में उठने वाली 'केल्विन वेव्स' को भी रिकॉर्ड किया था. ये केल्विन वेव्स दरअसल प्रशांत महासागर में सैकड़ों मील चौड़ी गर्म पानी की विशाल लहरें होती हैं, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करने की ताकत रखती हैं.

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वैज्ञानिक चेतावनियों से जुड़ी अन्य जानकारियां (5 वन-लाइनर न्यूज):

  • नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान समुद्री स्थितियां साल 1997 के ऐतिहासिक 'गॉडजिला अल नीनो' जैसी दिख रही हैं.
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया अल नीनो पिछले कई दशकों की सबसे भीषण और शक्तिशाली प्राकृतिक घटना हो सकता है.
  • नासा ने अंतरिक्ष से मिले इनपुट के आधार पर समुद्र का एक नक्शा जारी किया है, जिसमें लाल रंग बढ़ते जलस्तर को दिखाता है.
  • इस सैटेलाइट ने समुद्र में सैकड़ों मील चौड़ी गर्म पानी की लहरों यानी 'केल्विन वेव्स' की सक्रियता को भी रिकॉर्ड किया है.
  • दुनिया भर के मौसम विज्ञानी इस बढ़ती समुद्री गर्मी पर नजर रख रहे हैं ताकि आने वाले बड़े संकट से बचा जा सके.