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150 साल बाद लाइब्रेरी को वापस मिली किताब, लेट फाइन जानकर उड़ जाएंगे आपके होश!

ऑस्ट्रेलिया की एक लाइब्रेरी में 150 साल बाद ऐतिहासिक किताब वापस मिली. आइय इसके लेट फाइन और इसके पीछे की अनोखी कहानी के बारे में जानें.

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लाइब्रेरी में 150 साल बाद लौटी किताब

लाइब्रेरी से जुड़ी एक हैरान करने देने वाली खबर सामने आई है. ऑस्ट्रेलिया की एक लाइब्रेरी से ली गई किताब पूरे 150 साल बाद वापस लौट आई है. किआमा शहर की इस लाइब्रेरी से वर्ष 1858 में छपी ‘एंटीक्विटीज ऑफ एथेंस’ नाम की यह किताब जारी हुई थी. हाल ही में एक व्यक्ति को घर की मरम्मत के दौरान बंद पड़ी चिमनी के पास एक बक्से में यह किताब मिली. उसने तुरंत इसे लाइब्रेरी को सौंप दिया. लाइब्रेरी प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अपने इतिहास में इतनी पुरानी किताब कभी वापस आते नहीं देखी है. इतने सालों तक गायब रहने के बाद अब यह किताब लाइब्रेरी की एक खास ऐतिहासिक धरोहर बन चुकी है.

कितना बना है लेट फाइन?

किताब के अंदर छपे पुराने नियमों के हिसाब से अगर आज की महंगाई जोड़कर लेट फीस का हिसाब लगाया जाए, तो फाइन लगभग 18.7 लाख रुपये यानी 28,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बैठता है. हालांकि, यह फाइन किससे लिया जाए, इसका कोई जरिया नहीं है. लाइब्रेरी का 1870 के दशक का पुराना रिकॉर्ड रजिस्टर खो चुका है, जिससे यह पता लगाना नामुमकिन है कि इसे कौन ले गया था. लाइब्रेरी के पुराने नियमों के मुताबिक एक परिवार तीन किताबें तभी ले सकता था जब घर के कम से कम छह लोग पढ़ना जानते हों. इसके अलावा शराब के नशे में आने वालों को किताबें नहीं दी जाती थीं.

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अब प्रदर्शनी में रखी जाएगी किताब

चिमनी के पास रखे रहने के कारण किताब को पानी से थोड़ा नुकसान जरूर पहुंचा है. यह किताब लाइब्रेरी की शुरुआती 1000 किताबों के संग्रह में 506वें नंबर पर दर्ज थी. ऐसा माना जा रहा है कि लाइब्रेरी खुलने के कुछ ही सालों के भीतर यह गायब हो गई थी. लाइब्रेरी प्रशासन ने तय किया है कि अब इस पुरानी किताब को स्थानीय इतिहास की प्रदर्शनी में रखा जाएगा. अधिकारियों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे अब इस किताब को दोबारा किसी को पढ़ने के लिए बाहर नहीं देंगे, क्योंकि वे इसे वापस पाने के लिए फिर से 150 साल का इंतजार नहीं कर सकते.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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