Deeksha Priyadarshi
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Food container tied with red cloth: आपने कई बार मार्केट में चलते हुए ठेले पर रखी बिरयानी, पुलाव, चाट या कुल्फी की देग या देगची(खाना रखे जाने वाला बड़ा बर्तन) को लाल रंग के कपड़े से ढका देखा होगा, क्या आपने कभी ठहर कर एक बार भी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों है। इन देगचियों को क्यों सिर्फ लाल रंग के कपड़े से ही ढका जाता है। ये यूं ही है, या फिर इसके पीछे कोई वजह छिपी है।
इसे लेकर आपको कई तरह के जवाब मिल सकते हैं। लोगों के पास अपने-अपने जवाब हैं। लोगों के इसे लेकर अपने-अपने अदांजे हैं। मगर, जो सबसे संतुष्ट कर देने वाला जवाब है वो है कि लाल रंग का कपड़ा लपेटने से लोग खाने की ओर आकर्षित होते हैं। यही कारण है कि लाल रंग के कपड़े को उन देगचियों पर लपेटा जाता है।
कई शेफ, रेस्त्रां मालिक का कहना है कि इसके पीछे की एक वजह ये भी है कि लाल रंग का कपड़े के ऊपर गंदगी नहीं दिखती है, जिसके कारण देगचियों का ढकने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
खाने को लग जाती है नजर
पहले के समय में लोग सफर करते समय खाने को कपड़े में खाने को लपेट कर ले जाते थे, ताकि खाने में किसी की नजर ना लगे। आज भी इसलिए ठेले या दुकान पर देग के ऊपर लाल कपड़ा बांधते है ताकि खाना बुरी नजर से बचा रहे।
इसके अलावा कुल्फी और मिल्क शेक के मटके को लपेटने के लिए मोटे टेक्सचर वाला लाल कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है और भिगो कर लपेटा जाता है ताकि मटके पर बाहर के टेम्परेचर का ज्यादा असर न पड़े।
कहा जाता है कि मुगल काल में लाल रंग के दस्तरखान पर खाना परोसा जाता था। ये मुगलों के शाही अंदाज को दर्शाता था। यही कारण है कि आज भी मुगलों के उस शाही अंदाज को अपनाया जाता है, ताकि लोगों को लगे कि देग के अंदर रखा खाना शाही और लजीज है।
कई लोगों का मानना है कि लाल कपड़े के लपेटने से लोग समझते हैं कि देग भरी है। वहीं अगर कपड़ा ना लपेटा जाए तो लोगों को लगता है कि खाना खत्म हो चुका है, देग खाली है।
वहीं कई लोगों का मानना है कि इसके पीछे का कारण ये भी हो सकता है कि देग अगर कहीं से दब जाए या खराब हो जाए तो कपड़ा ढक देने वो दिखेगा नहीं।
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