सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर इन दिनों 19 साल की गौरी एम की सफलता की कहानी जमकर वायरल हो रही है जिसने बड़ी-बड़ी डिग्रियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुनिया की मशहूर कार निर्माता कंपनी बीएमडब्ल्यू ने गौरी को एक फुल-टाइम मार्केटिंग रोल के लिए चुना है जबकि उनके पास अभी कोई कॉलेज डिग्री नहीं है. आमतौर पर जिस पद के लिए करीब पांच साल का अनुभव मांगा जाता है वहां गौरी ने महज अपने टैलेंट और डिजिटल प्रोफाइल के दम पर जगह बना ली है. उनकी इस उपलब्धि ने उन सभी युवाओं को हैरान कर दिया है जो केवल किताबी ज्ञान को ही नौकरी का एकमात्र रास्ता मानते थे.
पर्सनल ब्रांडिंग का दिखा जलवा
गौरी की इस कामयाबी के पीछे उनका मजबूत पर्सनल ब्रांड और सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त पकड़ को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. लिंक्डइन पर उनके 65 हजार और इंस्टाग्राम पर 35 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं जो उनकी डिजिटल मार्केटिंग स्किल्स का सीधा सबूत पेश करते हैं. खुद गौरी ने अपने ऑफर की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें इस नौकरी के लिए कोई आवेदन या ईमेल नहीं करना पड़ा बल्कि कंपनी ने खुद उनकी प्रोफाइल देखकर उनसे संपर्क किया. उनके साथ ही एक हफ्ते के भीतर तीन और कंपनियों ने उन्हें बिना मांगे नौकरी के ऑफर दिए जिसने पर्सनल ब्रांडिंग की ताकत को साबित कर दिया है.
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किस्मत नहीं मेहनत का नतीजा
इंटरनेट पर लोग इसे केवल किस्मत का खेल नहीं बल्कि लगातार की गई मेहनत और सही दिशा में किए गए काम का परिणाम बता रहे हैं. गौरी पिछले काफी समय से टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं और वे लगातार सोशल मीडिया पर अपना नजरिया और कंटेंट शेयर करती रहती हैं. जानकारों का कहना है कि आज के दौर में आपका लिंक्डइन और इंस्टाग्राम अकाउंट किसी छोटे प्रोजेक्ट या पोर्टफोलियो की तरह काम करता है जो सही लोगों तक आपकी पहुंच बनाता है. गौरी ने साबित कर दिया कि अगर आपके पास सही हुनर है और आप उसे दुनिया को दिखाना जानते हैं तो बड़ी कंपनियां खुद आपके पास चलकर आती हैं.
शिक्षा बनाम हुनर पर छिड़ी बहस
गौरी की इस वायरल कहानी ने पेशेवर दुनिया में डिग्री बनाम हुनर की एक नई बहस को जन्म दे दिया है जिसमें लोग दो गुटों में बंट गए हैं. जहां एक तरफ युवा प्रोफेशनल्स इसे आधुनिक करियर का नया और सही रास्ता बता रहे हैं वहीं कुछ लोग इसे लेकर थोड़े शंका में भी नजर आ रहे हैं. कुछ यूजर्स का कहना है कि हर क्षेत्र में बिना डिग्री के काम नहीं चल सकता और फॉर्मल एजुकेशन की अपनी एक अलग अहमियत होती है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. इसके बावजूद यह कहानी लाखों छात्रों के लिए एक मिसाल बन गई है जो पारंपरिक रास्तों से हटकर कुछ अलग करने और अपनी अलग पहचान बनाने का सपना देख रहे हैं.