कोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी और भाजपा की कोर टीम के अहम सदस्य चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार को रोककर ताबड़तोड़ फायरिंग की. घटना के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और भाजपा ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ देर रात मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके से होकर अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान हमलावरों ने उनकी कार को घेर लिया और करीब 16 राउंड गोलियां चलाईं. कार में उनके साथ बुद्धदेव बेरा नामक व्यक्ति भी मौजूद थे. दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चंद्रनाथ रथ को मृत घोषित कर दिया. बेरा का इलाज जारी है.
मृदुभाषी लेकिन बेहद प्रभावशाली संगठनकर्ता
पूर्व मेदिनीपुर के चंडीपुर निवासी चंद्रनाथ रथ सार्वजनिक राजनीति में भले बड़ा चेहरा नहीं थे, लेकिन भाजपा संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी. रामकृष्ण मिशन के छात्र रहे रथ अनुशासनप्रिय और शांत स्वभाव के व्यक्ति माने जाते थे. युवावस्था में उनका झुकाव आध्यात्म की ओर भी रहा, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय वायुसेना (IAF) ज्वाइन कर ली.
करीब दो दशक तक एयरफोर्स में सेवा देने के बाद उन्होंने वीआरएस लिया. इसके बाद कुछ समय कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के पश्चात वे शुभेंदु अधिकारी की कोर टीम में शामिल हो गए. धीरे-धीरे वे शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने लगे.
टीएमसी से भाजपा तक परिवार का राजनीतिक सफर
चंद्रनाथ रथ का परिवार पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ था. उनकी मां हसी रथ पूर्व मेदिनीपुर में पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. वर्ष 2020 में शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने के बाद रथ परिवार ने भी तृणमूल छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया.
भाजपा सूत्रों के अनुसार, चंद्रनाथ रथ पार्टी के कई अहम राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी संभालते थे. हालिया चुनावों में भवानीपुर क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और कार्यकर्ताओं के समन्वय की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी.
भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम विवाद से आए थे चर्चा में
30 अप्रैल को भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम के बाहर हुए विवाद के दौरान भी चंद्रनाथ रथ चर्चा में आए थे. उस दिन मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्ट्रॉन्गरूम पहुंची थीं. शुभेंदु अधिकारी की अनुपस्थिति में भाजपा समर्थकों का नेतृत्व चंद्रनाथ रथ ने ही संभाला था.
सूत्रों के मुताबिक, स्ट्रॉन्गरूम के बाहर टीएमसी की गाड़ी खड़ी होने को लेकर उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई थी. भाजपा के विरोध के बाद पुलिस और सीआरपीएफ को वह वाहन हटाना पड़ा था. इस घटना के बाद वे भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच और अधिक चर्चित हो गए थे.
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हत्या के बाद बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद भाजपा ने इसे “राजनीतिक हत्या” करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि राज्य में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस हत्या के बाद राज्य में पहले से जारी राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है.
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