पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक साथ कई बड़े फैसले लिए हैं. राज्य सरकार ने मौजूदा ओबीसी लिस्ट को रद्द करते हुए नए सिरे से इंक्वायरी पैनल बनाकर योग्यता तय करने का फैसला लिया है. बंगाल की कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि यह निर्णय कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार ही लिया गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट ने ओबीसी आरक्षण से 77 समुदायों को बाहर करने का निर्णय लिया है. ऐसा कैबिनेट द्वारा ओबीसी सूची में संशोधन को मंजूरी दिए जाने की वजह से होगा.
शुभेंदु कैबिनेट में लिया गया फैसला
सोमवार को पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में ओबीसी सूची पर बड़ा फैसला लिया गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में हाई कोर्ट के आदेशों के अनुपालन का निर्णय लिया गया है. कैबिनेट की बैठक में ओबीसी सूची में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूर कर किया गया. ऐसे में मौजूदा सूची में फेरबदल होगा. जो मौजूदा सूची है वह अप्रभावी नहीं होगा. नगर मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि ओबीसी सूची पर पुनर्विचार किया जाएगा. सोमवार को नबन्ना में कैबिनेट बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अग्निमित्रा ने कई फैसलों की घोषणा की.
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77 समुदायों पर पड़ेगा असर
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि कहा-पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन नौकरियों और पदों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण पर पुनर्विचार किया जाएगा. राज्य सरकार उप-वर्गीकरण को समाप्त करके ओबीसी सूची में संशोधन करेगी. मंत्री ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा 22 मई, 2024 को दिए गए निर्देशों के अनुसार सूची में संशोधन किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों में उल्लिखित सभी समूहों को शामिल करने के संबंध में निर्णय लेगी. वामपंथी युग के अंत से लेकर तृणमूल युग के प्रारंभ तक, राज्य सरकार ने कुल 77 समुदायों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया था.
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