पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी और बागी गुट को चुनाव आयोग ने नए नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं. ममता बनर्जी को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम मिला है और उनका चुनाव चिह्न है- फुटबॉल खिलाड़ी. वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है.
ये भी पढ़ें: ‘वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी…’, TMC वाले मामले में राहुल गांधी का EC पर निशाना, BJP ने किया पलटवार
---विज्ञापन---
क्या बोले ऋतब्रत बनर्जी?
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न मिलने पर कहा, "हम मिलकर फैसले लेते हैं और हमने 3 नाम दिए थे. चुनाव आयोग ने हमें 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है." आपको बता दें, पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने ये फैसला लिया. गुरुवार रात जारी एक अंतरिम आदेश में, चुनाव आयोग ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' (AITC) नाम के इस्तेमाल को लेकर विवाद में उलझे दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे आगामी उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और उसके 'जोड़ा घास फूल' (घास के साथ दो फूल) चिह्न का इस्तेमाल न करें. साथ ही, आयोग ने उनसे शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चिह्न बताने को कहा.
क्यों हुआ बंटवारा?
चुनाव आयोग का ये आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC विधायक दल में हुई बगावत की वजह से आया है, जो बाद में संसद तक फैल गई थी. जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना और स्पीकर से मान्यता हासिल की. ये पार्टी के 28 साल के इतिहास में उसका पहला बंटवारा था. पांच दिन बाद, ये बगावत संसद तक पहुंच गई. काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में लोकसभा के 20 सांसदों ने कम जानी-मानी NCPI का साथ दिया और स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर BJP के नेतृत्व वाले NDA को एक अलग गुट के तौर पर समर्थन देने की बात कही. इससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई.
---विज्ञापन---
ये भी पढ़ें: EC के आदेश के तुरंत बाद एक्टिव हुईं ममता बनर्जी, आधी रात भेजे पसंद के पार्टी नाम और चुनाव चिह्न
---विज्ञापन---