मख्यमंत्री से वकील बनीं ममता बनर्जी के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। चुनाव के दौरान हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों से जुड़े मामले की पैरवी कलकत्ता हाई कोर्ट में करने के बाद वे बार काउंसिल के निशाने पर आ गई हैं। ममता बनर्जी सफेद कुर्ते पर काला कोट पहनकर वकील बनकर हाई कोर्ट पहुंची थीं, लेकिन बाहर निकलने पर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। इस बार वे विपक्षियों के साथ-साथ प्रदेश की जनता के निशाने पर भी हैं। वहीं अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उनके बतौर वकील रजिस्ट्रेशन और वकालत की प्रैक्टिस संबंधी जानकारी मांगी है।
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ममता बनर्जी के खिलाफ चोर-चोर के नारे लगे
ममता बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस सुजॉय पॉल और पार्थ सारथी सेन की बेंच के सामने पेश होकर उस हिंसा को रोकने में मदद करने का अनुरोध किया, जो उनके अनुसार 4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से पूरे राज्य में भड़क उठी है। उन्होंने कहा कि यह हिंसा महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर की गई है। इसके बाद जब वह बाहर निकल रही थी तो चोर, चोर के नारे लगाए गए, जिन्हें सुनकर वे भावुक हो गई थीं। तृणमूल कांग्रेस के नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को तंग करने के आरोप लगाए हैं।
बार काउंसिल ने इन सवालों के जवाब मांगे हैं
बता दें कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को 2 दिन के अंदर सूचनाएं सौंपने का आदेश दिया। साथ ही एक चेकलिस्ट सौंपी गई है, जिसमें ममता बनर्जी का नामांकन नंबर और उसकी तिथि पूछी गई है, अगर वे पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल में नामांकित हैं तो। क्या उनका नाम वर्तमान में बार काउंसिल में दर्ज है, इसका जवाब भी मांगा गया हे। क्या उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वकालत से निलंबन या निलंबन की कोई सूचना दी थी?
यदि हां तो वह तारीख पूछी है, जब राज्य बार काउंसिल को इसकी सूचना प्राप्त हुई थी और साथ ही आवेदन की एक प्रति भी मांगी है। यदि अभ्यास पुनः शुरू करने के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया गया था तो उसकी तारीख और आवेदन की डिटेल मांगी है। क्या राज्य बार काउंसिल के पास उनके पक्ष में कोई प्रैक्टिस सर्टिफिकेट या प्रैक्टिस-स्टेटस रिकॉर्ड उपलब्ध है? क्या वह वर्तमान में वैलिड, एक्टिव, निलंबित या किसी अन्य स्थिति में है? क्या मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान या उसके बाद वकालत करने के उनके अधिकार से संबंधित कोई अन्य रिकॉर्ड, सूचना, संवाद, आदेश या एंट्री मौजूद है?
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लॉ ग्रेजुएट और इस्लामी इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट
वकालत के नियमों के अनुसार, कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद वकालत करने के लिए केंद्र या राज्य की बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। ममता बनर्जी के पास इस्लामी इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ-साथ एजुकेशन और लॉ में ग्रेजुएशन की डिग्री भी है, लेकिन अगर उन्होंने बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन को कागजात नहीं दिखाए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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