पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. नंदीग्राम और हुगली के बाद अब आसनसोल के काली पहाड़ी इलाके में एक प्राचीन हनुमान मंदिर को निशाना बनाया गया है जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है. मंगलवार को कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर परिसर में घुसकर हनुमान जी की मूर्ति के साथ-साथ शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित कर दिया. जैसे ही इस घटना की खबर स्थानीय लोगों तक पहुंची वहां भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. चुनाव के मुहाने पर खड़े बंगाल में धार्मिक स्थलों पर बढ़ते हमलों ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
BJP का जोरदार विरोध और सड़कों पर प्रदर्शन
मंदिर में हुई इस तोड़फोड़ के विरोध में बीजेपी ने मोर्चा संभाल लिया है और राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है. आसनसोल दक्षिण से बीजेपी उम्मीदवार अग्निमित्रा पाल अपनी पार्टी के नेताओं और सैकड़ों समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचीं और घटना की कड़े शब्दों में निंदा की. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आसनसोल दक्षिण थाने के बाहर डेरा डाल दिया है और दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. विरोध इतना उग्र हो गया कि प्रदर्शनकारियों ने जीटी रोड पर टायर जलाकर रास्ता पूरी तरह जाम कर दिया है. इस व्यस्त मार्ग के बंद होने से शहर की रफ्तार थम गई है और आम लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
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सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की मंशा पर सवाल
अग्निमित्रा पाल ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में जानबूझकर हिंदू धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने इस घटना को एक सोची-समझी साजिश करार दिया और नंदीग्राम तथा हुगली की पुरानी घटनाओं का हवाला भी दिया. बीजेपी नेता ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया कि मंदिर के आसपास कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे जिससे जांच में मुश्किलें आ रही हैं. उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन केवल जांच का भरोसा दे रहा है जबकि हिंदू समाज अब ठोस कार्रवाई और सुरक्षा की गारंटी चाहता है. प्रशासन की ढिलाई को लेकर बीजेपी समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय बलों की तैनाती
आसनसोल में बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल के साथ-साथ केंद्रीय बलों की टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है. वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि बीजेपी नेता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और थाने के सामने उनका धरना प्रदर्शन लगातार जारी है. बंगाल चुनाव से पहले हुई इस घटना ने राज्य में सांप्रदायिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज कर दिया है.
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