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अखिलेश यादव को बड़ा झटका, योगी सरकार ने वापस लिया मदरसा शिक्षक-कर्मचारी वेतन विधेयक, जानें मामला और क्यों था विवाद?

अखिलेश यादव की सरकार के समय पारित मदरसा वेतन विधेयक का अध्याय समाप्त हो गया है, क्योंकि योगी सरकार ने विधेयक को वापस ले लिया है. विधानमंडल के दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित करके विधेयक को औपचारिक रूप से वापस लेकर योगी सरकार ने इसे खत्म कर दिया है.

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अखिलेश यादव की सरकार ने साल 2016 में बिल विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित कराया था.

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को बड़ा झटका दिया है. योगी सरकार ने 2016 में पारित मदरसा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन संबंधी विधेयक को वापस ले लिया है. विवाद होने पर योगी सरकार ने पहले बिल लागू करने पर रोक लगाई और फिर विधानमंडल के दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित करके विधेयक को इसे वापस ले लिया. कानूनी, संवैधानिक आपत्तियों के चलते राज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिल को मंजूर नहीं किया, जिस वजह से यह लागू नहीं हो सका. अब योगी सरकार ने 10 साल से लंबित बिल को औपचारिक रूप से वापस लेकर अध्याय ही समाप्त कर दिया.

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वेतन समय पर नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान

बता दें कि मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन दिलाने के लिए अखिलेश यादव की सरकार ने विधानसभा और विधान परिषद से विधेयक को पारित कराया था. मदरसा कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन को लेकर इसमें प्रावधान किया गया था कि अगर वेतन समय पर नहीं दिया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा, लेकिन इस प्रावधान पर कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े हुए. आपत्तियों के बावजूद विधेयक को मंजूरी के लिए उस समय के गवर्नर राम नाईक के पास भेजा गया, लेकिन विधेयक के प्रावधानों पर असहमति जताई और इसे राष्ट्रपति के विचारार्थ भेज दिया.

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केंद्र सरकार ने की थी विधेयक वापस लेने की सिफारिश

राष्ट्रपति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से विधेयक की समीक्षा कराई तो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी विधेयक के प्रावधानों पर आपत्तियां जताई. गृह मंत्रालय ने माना कि इसके प्रावधान कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से सही नहीं हैं. इसलिए विधेयक को वापस लेने का सुझाव दिया जाता है. इसलिए विधेयक कभी कानून नहीं बन सकता और यह 10 साल तक लंबित रहा. योगी सरकार का मानना है कि दोनों सदनों में पारित जिस विधेयक को संवैधानिक मंजूरी नहीं मिली और वह लागू नहीं हुआ तो उसे लंबित रखने का कोई औचित्य ही नहीं है. इसलिए दोनों सदनों से औपचारिक वापसी के साथ ही लंबित विधेयक को खत्म ही कर दिया गया है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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