अयोध्या के राम मंदिर के लिए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को नियुक्त किया जाना है. इसके लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने देशभर के CEO बनने के इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे, लेकिन आवेदन इतने ज्यादा आ गए हैं कि ट्रस्ट ने पद पर नियुक्ति एक महीने के लिए टाल दी है. ट्रस्ट को एक पद के लिए 5200 आवेदन मिले हैं, इसलिए 22 जुलाई को हुई ट्रस्ट की मीटिंग में फैसला किया गया कि 2 सितंबर को बैठक करके CEO का ऐलान किया जाएगा, क्योंकि 3 सदस्यीय चयन समिति ने 5200 आवेदनों की जांच के लिए समय मांगा है, उसके बाद ही एक नाम फाइनल होगा.
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देश के सबसे बड़े धार्मिक पदों में शामिल होगा पद
बता दें कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का काम राम मंदिर और इससे मैनेजमेंट से जुड़े काम होगा. वहीं यह पद देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों के प्रशासनिक पदों में से एक होगा. जुलाई महीने की शुरुआत में ही पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे और आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई थी. वहीं आवेदनों की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था. लेकिन जरूरत से ज्यादा आवेदनों के कारण चयन समिति ने पद पर नियुक्ति के लिए समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार भी कर लिया और नियुक्ति टालने का ऐलान किया.
राम मंदिर का CEO बनने के लिए जरूरी योग्यताएं
ट्रस्ट की ओर से जारी नोटिफिकेशन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद पर नियुक्ति के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं. जैसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनने के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. उसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाएं बोलनी आनी चाहिए. आवेदन को एडमिनिस्ट्रेशन और मैनेजमेंट का अनुभव होना अनिवार्य है. मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की पहली जिम्मेदारी मंदिर को मैनेज करना और अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की रक्षा करना होगा. पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की औपचारिक नियुक्ति होगी.
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राम मंदिर दान की चोरी के मुद्दे से गरमाई सियासत
बता दें कि समाजवादी पार्टी ने पिछले महीने राम मंदिर दान चोरी का मुद्दा उठाया था. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर गठित SIT ने जांच की तो दान चोरी की शिकायत सही निकली. राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव, सदस्यों और दान गिनने वाले कर्मचारियों पर आरोप लगे और चोरी किए गए दान की रिकवरी भी हुई. पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया. वहीं चंपत राय समेत कई सदस्यों को ट्रस्ट से इस्तीफा देना पड़ा. ट्रस्ट को नए अध्यक्ष मिल गए हैं और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, लेकिन इस मुद्दे ने प्रदेश और देश की सियासत के गरमा दिया.
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