राम मंदिर के चढ़ावे में हुए करोड़ों रुपये के गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. वहीं, इस मामले को लेकर की गई कार्रवाई पर पहली बार राम मंदिदर का प्रबंधन संभालने वाले 'राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' ने बयान जारी किया है. बता दें कि ट्रस्ट ने पुष्टि की है कि उसके महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट्री डॉ. अनिस मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है.
वहीं, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा कि अगली बैठक में इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा. साथ ही यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की तरफ से दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण, आदि हिसाब के साथ सुरक्षित हैं.
हालांकि, ट्रस्ट की ओर से राम मंदिर को लेकर हुए खुलासों और विवाद पर किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की गई है. अब लोगों के बीच ये सवाल भी उठ रहे हैं कि राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट क्या है औक कैसे काम करता है और इसे किसने और कब बनाया था. इसकी कार्यशैली कैसी है. तो चलिए आज इसी पर चर्चा करते हैं.
क्या है राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय है, जिसे अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर के निर्माण, वित्त और प्रशासन की देखरेख के लिए स्थापित किया गया है.
कैसे हुआ राम मंदिर ट्रस्ट का गठन?
मिली जानकारी के अनुसार, नवंबर 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर निर्माण और इसके संचालन की देख-रेख के लिए इसके गठन का आदेश दिया गया था.
कब हुई इसकी स्थापना?
मिली जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकारल द्वारा किया गया था. पीएम मोदी ने संसद में इस ट्रस्ट के गठन और राम मंदिर निर्माण के लिए सभी निर्णय लेने की स्वतंत्रता देने का ऐलान किया.
क्या ट्रस्ट हो सकता है भंग?
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों ने इसे और बल दिया है. दोनों के इस्तीफे के बाद पहले से रिक्त एक ट्रस्टी पद को मिलाकर ट्रस्ट के तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएंगे. ऐसी स्थिति में वर्तमान ट्रस्ट भंग कर उसके पुनर्गठन की संभावना बन सकती है.
खबरों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में किया था. इसलिए ट्रस्ट को भंग करना या उसकी जगह नई व्यवस्था लागू करना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा. इसके लिए केंद्र सरकार को विधिक प्रक्रिया अपनानी होगी और आवश्यकता पड़ने पर नई अधिसूचना अथवा अन्य वैधानिक प्रावधान करने पड़ सकते हैं.
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कौन-कौन हैं ट्रस्ट के सदस्य?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान है, जिनमें से 12 सदस्यों को सरकार की तरफ से नामित किया गया था और तीन का चय ट्रस्ट में पहली बैठक में हुआ था. मौजूदा समय में ट्रस्ट में 14 सदस्य हैं. इसके एक सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का अगस्त 2025 को निधन हो गया था. वे अयोध्या के शाही परिवार के वंशज थे.
महंत नृत्य गोपाल दास
यह श्री राम जन्मभूमि न्यास और श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष होने के साथ-साथ अयोध्या की छोटी छावनी के पीठाधीश्वर भी हैं.
चंपत राय
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के उपाध्यक्ष. यह ट्रस्ट के महासचिव हैं. इनकी मुख्य जिम्मेदारी मंदिर का दिन-प्रतिदिन का प्रशासन संभालना, सार्वजनिक संचार देखना और मंदिर निर्माण की देखरेख करना है.
डॉ. अनिल मिश्रा
यह एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं, जो आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं और ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य हैं. ट्रस्ट के प्रमुख निर्णयों में इनकी अहम भूमिका रही है.
स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज
एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं. इनका पूर्व नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय इन्होंने ही प्रधानमंत्री मोदी को अपना 11 दिन का उपवास तोड़ने के लिए चरणामृत दिया था. यह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं. इनकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के सभी वित्तीय मामलों की देखरेख करना है.
नृपेंद्र मिश्रा
यह मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य हैं. यह 1967 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं, जो 2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव भी रहे हैं. इनकी मुख्य भूमिका राम मंदिर के निर्माण कार्य की देखरेख और उसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है.
कृष्णा मोहन
यह महाराष्ट्र कैडर के एक सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी हैं. ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इन्हें सितंबर 2025 में ट्रस्ट में शामिल किया गया था. यह मंदिर के निर्माण में मार्गदर्शन में शामिल रहे हैं.
शशांक त्रिपाठी
यह 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में अयोध्या के जिलाधिकारी (डीएम) के रूप में कार्यरत हैं. इनकी मुख्य जिम्मेदारी प्रशासनिक मामलों, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में समन्वय की सुविधा प्रदान करना है. हालांकि, दान या खातों के प्रबंधन में जिलाधिकारी की सीधी भूमिका नहीं होती.
युगपुरुष परमानंद गिरी
यह एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं जिन्हें कर्म योगी और ज्ञानी योगी भी कहा जाता है.
संजय प्रसाद
यह बिहार के 1995 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं. यह ट्रस्ट में यूपी सरकार के प्रतिनिधि के रूप में एक पदेन सदस्य हैं.
प्रशांत लोखंडे
यह एजीएमयूटी कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो सीबीएसई के अध्यक्ष हैं. यह ट्रस्ट में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि (पदेन सदस्य) हैं.
दिनेंद्र दास
यह अयोध्या के निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो राम मंदिर मामले में कोर्ट में वादियों (पक्षकारों) में से एक था.
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती
यह बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं.
स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ
यह कर्नाटक के उडुपी स्थित अष्ट मठों में से एक, श्री पेजावर अधोक्षज मठ के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं. प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अयोध्या में हुए पूजा कार्यक्रमों का नेतृत्व करने की अहम जिम्मेदारी इन्होंने निभाई थी.
के. परासरन
यह ट्रस्ट के संस्थापक-ट्रस्टी सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं. इन्होंने राम जन्मभूमि विवाद में राम लला विराजमान का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा था.
कैसे चलता है ट्रस्ट का प्रशासन?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पूरी तरह से स्वायत्त और स्वतंत्र निकाय है, जो अपने खुद के विलेख (डीड) से संचालित होता है.
प्रशासनिक ढांचा और नियंत्रण
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मंदिर का दिन-प्रतिदिन का प्रशासन और सार्वजनिक संचार का कार्य संभालते हैं. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी सभी वित्तीय मामलों की देखरेख करते हैं, जबकि अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ट्रस्ट की अध्यक्षता करते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार या प्रशासन का ट्रस्ट के खातों या दान प्रबंधन पर कोई नियंत्रण नहीं है.
गिनती की प्रक्रिया
नकदी गिनने का काम दो शिफ्टों में होता है, जिसमें लगभग 50 लोग शामिल होते हैं. निजी एजेंसी के कर्मचारी नोट गिनते हैं, ट्रस्ट के 12 कर्मचारी उनकी निगरानी करते हैं, सीसीटीवी नेटवर्क संभालने की जिम्मेदारी टीसीएस की है. अंत में 14 एसबीआई कर्मचारी पैसे जमा करने से पहले नोटों के बंडलों का सत्यापन करते हैं.
दान और नकदी प्रबंधन की प्रक्रिया
बहु-स्तरीय व्यवस्था में मंदिर परिसर में लगभग 35 दान पेटियां रखी गई हैं. ट्रस्ट ने दान की गिनती और बैंकिंग के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को अधिकृत किया है, जिसने इस काम को एक निजी एजेंसी को आउटसोर्स कर दिया.
ट्रस्ट का जवाबदेही तंत्र
ट्रस्ट अपने प्रशासन में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी साझा करने का विरोध करता है और खुद को एक स्वतंत्र संस्था मानता है. गृह मंत्रालय ने भी कहा था कि यह ट्रस्ट सरकार द्वारा वित्त पोषित या नियंत्रित नहीं है. बीते साल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को यह तय करने का निर्देश दिया है कि यह ट्रस्ट आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के दायरे में आता है या नहीं.
राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर क्यों हो रहा विवाद?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर हालिया विवाद मुख्य रूप से मंदिर में आए दान- नकदी, सोने-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी से जुड़ा है.
- दान की राशि में हेराफेरी और गायब होना
- कीमती वस्तुओं (सोने-चांदी) का गायब होना
- सबूत मिटाने के आरोप
- कर्मचारियों की बेहिसाब संपत्तियों का खुलासा
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की क्या है पहचान?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन सभी पर धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप लगा है. इन सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर 29 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है.
इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जिनके नाम इस प्रकार हैं-
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
- सुभाष श्रीवास्तव
- अनुकल्प मिश्रा
- लवकुश मिश्रा
- मनीष यादव
- अविनाश शुक्ला
- करुणेश पांडेय
- रमाशंकर मिश्र
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस की तीन मांगें
- कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सबसे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए, क्योंकि देश का इस ट्रस्ट पर भरोसा खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और अब उसी ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.
- कांग्रेस की दूसरी मांग है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए. पार्टी का कहना है कि अगर जांच सिर्फ राज्य सरकार या पुलिस के भरोसे रही तो सच सामने नहीं आएगा. इसलिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है.
- तीसरी मांग करते हुए कांग्रेस ने कहा कि ट्रस्ट में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. पार्टी का आरोप है कि अब तक सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जबकि फैसले लेने वाले बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया.
चढ़ावे को लेकर कांग्रेस पार्टी ने किया ये दावा
कांग्रेस पार्टी ने यह भी दावा किया है कि चढ़ावा चोरी की खबरें सामने आने के बाद राम मंदिर में मिलने वाले दान में कमी आई है. कांग्रेस के मुताबिक, श्रद्धालुओं का भरोसा प्रभावित हुआ है और यही वजह है कि अब लोग पहले की तरह खुलकर दान नहीं दे रहे.