उत्तर प्रदेश वालों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है, जिसका फायदा लाखों लोगों को होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल के ऐतिहासिक गोरखपुर तक का सफर अब कुछ ही घंटों में पूरा हो जाएगा. यानी कि राज्य में अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. शामली से गोरखपुर तक प्रस्तावित 742 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई दिशा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. करीब 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क के जरिए जोड़ेगा, जिससे लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से कुल 18 जिलों की तस्वीर बदल जाएगी और इन जिलों में विकास को रफ्तार मिलेगी.
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कई राज्यों को जोड़ेगा ये एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई राज्यों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी का माध्यम बनेगा. प्रस्तावित मार्ग हरियाणा सीमा के पास से शुरू होकर पूर्वी उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार सीमा तक पहुंचेगा. इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद हरियाणा, पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल और बिहार के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा. इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसका रूट कई स्थानों पर भारत-नेपाल सीमा के नजदीक से भी गुजरेगा, जिससे सीमा पार व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर भारत के परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.
18 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
यह विशाल एक्सप्रेसवे राज्य के कुल 18 जिलों से होकर गुजरेगा. इसमें शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और शाहजहांपुर जैसे पश्चिमी जिलों के साथ-साथ लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, संतकबीर नगर, गोरखपुर और कुशीनगर जैसे पूर्वी जिले भी शामिल हैं. बेहतर सड़क संपर्क के कारण इन क्षेत्रों में उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है. छोटे शहरों और कस्बों तक तेज परिवहन पहुंचने से स्थानीय कारोबार को भी नई रफ्तार मिल सकती है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया हाई-स्पीड कॉरिडोर
मीडिया रिपोर्ट की माने तो, एनएचएआई के अनुसार इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा. मुख्य सड़क चार लेन की होगी, जबकि बड़े पुल, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज को छह लेन मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा. अलग-अलग शहरों और कस्बों को जोड़ने के लिए एग्जिट और एंट्री प्वाइंट भी बनाए जाएंगे, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके. परियोजना के लिए कई जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा.
कब शुरू होगा ये नया एक्सप्रेसवे?
अगर सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरे होते हैं, तो साल 2030 तक इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों का संचालन शुरू किया जा सकता है. इसके अलावा NHAI भविष्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश को बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जोड़ने वाले एक और बड़े एक्सप्रेसवे पर भी काम करने की योजना बना रहा है. माना जा रहा है कि शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे बनने के बाद यूपी देश के सबसे मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में और मजबूती से अपनी जगह बना लेगा.
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