उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गठजोड़ और सीटों के बंटवारे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी के बीच चल रही जुबानी जंग अब तीखे तेवरों तक पहुंच गई है. दोनों नेता बीते कई दिनों से लगातार एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं.
दरअसल, अखिलेश यादव ने हाल ही में राष्ट्रीय लोकदल को लेकर तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि अगर एनडीए में जयंत चौधरी की पार्टी को 73 विधानसभा सीटें मिलती हैं, तभी यह माना जाएगा कि गठबंधन ने चौधरी चरण सिंह का सम्मान रखा है. अखिलेश के इस बयान पर जयंत चौधरी ने कड़ा जवाब दिया और कहा कि सीटों की संख्या का चौधरी चरण सिंह के सम्मान से कोई संबंध नहीं है.
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अगर मैंने मुंह खोला तो…- जयंत चौधरी
जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए यहां तक कह दिया कि अगर वह पुरानी राजनीतिक बातों को सार्वजनिक करने लगें तो सपा प्रमुख के लिए उत्तर प्रदेश में मुश्किल खड़ी हो सकती है. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर उन्होंने “मुंह खोल दिया” तो अखिलेश यूपी में खड़े नहीं हो पाएंगे. उनके इस बयान ने दोनों दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी को और चर्चा में ला दिया है.
यह विवाद केवल सीटों तक सीमित नहीं है. इससे पहले भी दोनों नेता एक-दूसरे पर राजनीतिक तंज कस चुके हैं. अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लेकर ‘चवन्नी से रुपया’ बनाने और राजनीति की एबीसीडी सिखाने जैसी टिप्पणी की थी. इसके जवाब में जयंत ने चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का हवाला देते हुए कहा था कि मुलायम सिंह यादव ने भी चौधरी चरण सिंह की पाठशाला से राजनीति सीखी थी. उन्होंने सपा की राजनीति को ‘गन्ना’ और ‘जाट’ के मुद्दों में उलझाने पर भी निशाना साधा था.
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UP-उत्तराखंड दोनों जगह लड़ेंगे चुनाव- जयंत चौधरी
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयंत चौधरी ने यूपी और उत्तराखंड दोनों राज्यों में चुनाव लड़ने की बात कही. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एनडीए के सभी घटक दल मिलकर चुनावी मुकाबला करेंगे. सीटों के बंटवारे पर उन्होंने कहा कि गठबंधन में कई बातें बातचीत का हिस्सा होती हैं और साझेदारी से जुड़ी हर बात सार्वजनिक नहीं की जाती.
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जयंत ने यह भी कहा कि रालोद को कितनी सीटें मिलती हैं या एक भी सीट नहीं मिलती, इससे चौधरी चरण सिंह के सम्मान पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उनके मुताबिक चौधरी चरण सिंह का सम्मान राजनीतिक सीटों का मोहताज नहीं है और वह लोगों के दिलों में कायम है.
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