यूपी चुनाव से पहले सरदार पटेल के सहारे BJP का बड़ा दांव! 98 जिलों में कुर्मी समाज तक पहुंचने की तैयारी

UP Assembly Elections: पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी सरदार पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल है. भाजपा इसे पटेल की विरासत को सम्मान देने की अपनी पहल के रूप में पेश करने की तैयारी में है.

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पटेल की विरासत के जरिए विपक्ष पर निशाना साधने की तैयारी. (Photo: ANI)

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है. इसी रणनीति के तहत पार्टी 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में कार्यक्रम आयोजित करेगी. बीजेपी के इस कार्यक्रम को कुर्मी समाज तक पार्टी की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इतना ही नहीं कार्यक्रमों की जिम्मेदारी भाजपा के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) मोर्चा को सौंपी जाएगी.

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पटेल की विरासत के जरिए विपक्ष पर निशाना

भाजपा के कार्यक्रमों का मेन सब्जेट सरदार पटेल का राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान और आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका होगी. भाजपा सूत्रों के मुताबिक, इन आयोजनों में गुजरात के केवड़िया में स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भी जिक्र किया जाएगा. आपको बता दें कि पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी सरदार पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल है. भाजपा इसे पटेल की विरासत को सम्मान देने की अपनी पहल के रूप में पेश करने की तैयारी में है.

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कुर्मी समाज पर क्यों है भाजपा की नजर?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुर्मी समाज को प्रभावशाली अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों में गिना जाता है. एक अनुमान के अनुसार, राज्य की आबादी में इसकी हिस्सेदारी करीब 5 से 7 प्रतिशत हो सकती है. हालांकि, जातिवार आबादी के ताजा और आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में इन अनुमानों में अंतर पाया जाता है. पूर्वांचल, अवध, मध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कई इलाकों में कुर्मी समुदाय की बड़ी मौजूदगी है. राजनीतिक आकलनों में करीब 48 से 50 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय को प्रभावशाली माना जाता है. सरदार पटेल का संबंध गुजरात के लेउवा पटेल समुदाय से था और कुर्मी समाज के बड़े हिस्से में भी उनके प्रति सम्मान देखा जाता है.

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2027 के चुनाव से पहले अहम पहल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. भाजपा के लिए पटेल जयंती सिर्फ एक स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण मजबूत करने का अवसर भी है. हालांकि, इन आयोजनों का कुर्मी समाज के राजनीतिक रुझान और आगामी चुनावों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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