BJP का जायका या अखिलेश यादव की जाति… UP में अब क्यों शुरू हुई 'चोखा बाटी' की राजनीति?

Akhilesh Yadav Baati Chokha Politics: अखिलेश यादव BJP के विरोध को बाटी चोखा विवाद का रूप देकर ब्राह्मणों को BJP के खिलाफ भड़काने और जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में बिठाने की ओच्छी राजनीति करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसा करके वे बेशक लोगों का समर्थन बटोर लें, लेकिन जाति आधारित राजनीति उन्हें चुनाव बिसात में कहां जगह देगी, यह तो वक्त ही बताएगा.

Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव राजनीति के माहिर खिलाड़ियों में गिने जाते हैं.

Politics in UP Over Baati Chokha: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अभी से जोड़-तोड़ की राजनीति करनी शुरू कर दी है, जिसका संकेत उन्होंने हाल ही बेवजह का एक राजनीतिक मुद्दा उठाकर दिया. उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रदेश का ब्राह्मण वर्ग BJP से नाराज है.

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इस नाराजगी का फायदा उठाकर अखिलेश यादव ने भी ओछी राजनीति करने से परहेज नहीं किया. इसलिए जब BJP ने ब्राह्मणों की जाति आधारित मीटिंग का विरोध किया तो अखिलेश यादव ने इसे खाने-पीने, सामाजिक मेल-जोल और ‘बाटी चोखा’ के विरोध का रूप देने का कोशिश की. ब्राह्मणों का पक्ष लेते हुए उन्हें BJP के खिलाफ भड़काने की कोशिश की.

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क्या है बाटी चोखा को लेकर छिड़ा विवाद?

बता दें कि दिसंबर महीने में ब्राह्मण समुदाय की एक बैठक में BJP के ब्राह्मण विधायक और पार्षद शामिल हुए थे, जिन्हें डिनर में बाटी चोखा परोसा गया था. इस बैठक में ब्राह्मण समुदाय से समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा भी हुई थी. इस बैठक की खबर BJP के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तक पहुंची तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए विधायकों-पार्षदों को चेतावनी दी कि इस तरह की जातिगत बैठकें नहीं होनी चाहिएं और उनमें विधायकों-पार्षदों को नहीं जाना चाहिए.

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अखिलेश यादव ने आतंरिक कलह बताई

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस चेतावनी को कोई और ही रूप दे दिया. अखिलेश यादव ने पंकज चौधरी की चेतावनी को आतंरिक कलह का रूप दिया और कहा कि नाराजगी की वजह बैठक नहीं, बाटी चोखा पर चर्चा है. क्योंकि डिनर में बाटी चोखा परोसा गया था. इसलिए एक जनवरी 2026 को अखिलेश यादव ने भी ग्रैंड बाटी चोखा पार्टी बुलाई, जिसमें प्रदेश के सभी विधायकों, पार्षदों, नेताओं और आम लोगों को न्योता दिया गया. इस पार्टी में लोगों को बाटी चोखा खिलाया गया.

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खाने-पीने पर बंदिश को भी गलत बताया

अखिलेश यादव भी इस पार्टी में आए और उन्होंने अपने विधायकों के साथ बाटी चोखा भी खाया. अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह खाने की चीज को लेकर राजनीति करना ठीक नहीं है. बाटी चोखा पूर्वांचल और बिहार का लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे ब्राह्मण नहीं खा सकते. BJP को जातीय बैठकें नापसंद होंगी, लेकिन समाजवादी पार्टी की विचारधारा सभी को साथ लेकर चलने की है. इस तरह आपसी झगड़ों और राजनीति में खाने-पीने और सामाजिक मेलजोल पर बंदिश नहीं होनी चाहिए.

बिहार का पारंपरिक व्यंजन है बाटी चोखा

बता दें कि बाटी-चोखा या लिट्टी-चोखा मूल रूप से बिहार का पारंपरिक व्यंजन है और इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल में भी पारंपरिक व्यंजन माना जाता है. सत्तू भरी गेहूं की बाटी और भुनी सब्जियों बैंगन, टमाटर, आलू का चोखा वाराणसी, गोरखपुर समेत पूर्वांचल के कई प्रदेशों में काफी पसंद किया जाता है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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