राम मंदिर अयोध्या के चढ़ावे यानी दान की हेरा-फेरी और चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिका दाखिल करके सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत से मामले में संज्ञान लेने की अपील की गई है। मामले की स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराकर सच पता लगाने की मांग की गई है। याचिका सुप्रीम कोर्ट के ही वकील अनूप अवस्थी ने दायर की है। उन्होंने चीफ जस्टिस से गुजारिश की है कि लोगों की आस्था और विश्वास के बनाए रखने के लिए मामले में FIR दर्ज कराई जाए।
विनय कटियार ने चंपत राय पर उठाए सवाल
बता दें कि सीनियर BJP नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े विनय कटियार भी विवाद में कूद गए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राम मंदिर के ट्रस्टी चंपत राय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कि अगर करोड़ों राम भक्तों की आस्था के प्रतीक राम मंदिर के ट्रस्टी खुद ही इस तरह की हेरा-फेरी करेंगे तो राम मंदिर का मकसद ही खत्म हो जाएगा। घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाना चाहिए। चंपत राय को भी बर्खास्त किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी विवाद पर खुद रख रहे नजर
विनय कटियार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मामले में हस्तक्षेप करना पड़ेगा। अब विशेष जांच समिति (SIT) सच का पता लगाएगी और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी अब इस विवाद पर नजर रख रहे हैं। देश में कोई भी मंदिर हो, नियम के अनुसार मंदिर का चढ़ावा निवास स्थान पर ले जाना अपराध है। राम मंदिर के दान के साथ ऐसा हुआ है और इसका जवाब चंपत राय को देना होगा कि ऐसा क्यों किया गया? किस नियत से, किसके साथ मिलकर किया गया?
जानें क्या है मामला और कैसे हुआ खुलासा?
राम मंदिर के दान की चोरी का मामला समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों का चढ़ावा गायब हुआ है। पुष्टि नहीं हुई, लेकिन करीब 7 करोड़ की चोरी का दावा किया गया है। राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज महीपाल सिंह ने भी दान की चोरी का दावा किया है। उन्होंने जब चोरी की शिकायत ट्रस्ट के पदाधिकारियों से की तो उन्हें पद से हटा दिया और 8 महीने पुराने CCTV फुटेज डिलीट किए कर दिए गए।
अब तक की पुलिस कार्रवाई और बरामदगी
बता दें कि अयोध्या पुलिस ने मामले की जांच करते हुए मंदिर के चढ़ावे को गिनने वाले लवकुश मिश्रा नामक कर्मचारी के घर से गोबर के ढेर में छिपाकर रखे गए 10 लाख बरामद किए गए हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय SIT गठित कर दी है। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर आईएएस विजय विश्वास पंत इस टीम को लीड कर रहे हैं। इस टीम को जांच के पहले 7 दिन में शुरुआती रिपोर्ट और 15 दिन के बाद फाइनल जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।