Noida News: नोएडा के फेज 3 थाना क्षेत्र में पुलिस ने फर्जी काॅल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। विदेशी नागरिकों से तकनीकी सहायता के नाम पर साइबर ठगी की जा रही थी। पुलिस ने मौके से 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से 23 लैपटॉप, 25 हेडसेट, 17 मोबाइल, एक पेन ड्राइव समेत बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। 18 आरोपियों में 2 महिलाएं भी शामिल है।
ऐसे करते थे धोखाधड़ी
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क के रूप में कार्य कर रहे थे। इनके द्वारा अमेरिकी नागरिकों का डेटा खरीदा जाता था और उनके सिस्टम में वायरस या बग भेजा जाता था। फिर ऐप्स की मदद से इंटरनेट कॉल के जरिए उन विदेशी नागरिकों को कॉल किया जाता और खुद को टेक्निकल सपोर्ट का कर्मचारी बताकर बात की जाती थी।
डाउनलोड करवाते थे ऐप
एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता ताकि सिस्टम पर रिमोट एक्सेस हासिल किया जा सके। इसके बाद सिस्टम हैक होने और बैंक अकाउंट से खतरे का झांसा दिया जाता ताकि पीड़ित डरे और तत्काल भुगतान करें। भुगतान ऐप या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से कराया जाता था।
सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था नेटवर्क
पुलिस को काफी समय से इस गिरोह की गतिविधियों पर संदेह था। सूचना पुख्ता होने पर बीती रात सेक्टर-65 स्थित ए-43 बिल्डिंग में छापेमारी की गई, जहां ये कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने कंप्यूटर में स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी जिससे पीड़ित को सिस्टम में वायरस या हैकिंग का भ्रम हो।
मुख्य आरोपी भी पकड़े गए
गिरफ्तार मुख्य आरोपियों में दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल और पंजाब से आए युवक और युवतियां शामिल हैं। प्रमुख रूप से ध्रुव अरोड़ा (दिल्ली) आकाश तिवारी (हरियाणा) मयूर नायक (राजस्थान) दिव्यांश (उत्तराखंड) रितु राजपूत (औरेया) सुकृति (पंजाब) मुख्य आरोपी है। अन्य आरोपी कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे।
साइबर अपराध का नया चेहरा
नोएडा जैसे क्षेत्र में फर्जी कॉल सेंटरों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध लगातार बढ़ रहा है। पुलिस इस मामले को आर्थिक और तकनीकी धोखाधड़ी से जोड़ते हुए आगे की जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान गिरोह के कुछ और साथियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।