Lucknow NEET student Uzair Khan Arrest: उत्तरप्रदेश की लखनऊ साइबर पुलिस ने 54 लाख 60000 रुपये की साइबर ठगी के चार आरोपियों को पकड़ा, जिसमें एक नीट का छात्र उजैर खान निकला. पकड़े गए चारों आरोपियों ने राजेंद्र प्रकाश वर्मा सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर को एनआईए,एटीएस का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करके डिजिटल हाउस अरेस्ट किया था और उन्हें डर दिखाकर 54 लाख 60 हजार रुपये ठगे. डिजिटल हाउस अरेस्ट कर ठगी करने वाले ये चारों आरोपी अंतरराष्ट्रीय गैंग से जुड़े हैं. पुलिस जांच में नीट की तैयारी कर रहा उजैर खान इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी है.
उजैर करता था गैंग का सारा टेक्निकल काम
उजैर इस पूरे साइबर ठगी गैंग का सारा टेक्निकल काम के साथ-साथ लैपटॉप, सर्वर, नेटवर्क कैसे फ्लकचुएट करना है ये सब काम उजैर करता था पकड़े गए अन्य आरोपी सुफियान, आजम, आरिफ इकबाल इन सब के अलग-अलग काम बाटे हुए थे पकड़े गए आरोपियों ने राजेन्द्र प्रकाश वर्मा को खुद को इंस्पेक्टर व एनआईए, एटीएस का अधिकारी बनकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल किया पीड़ित राजेंद्र प्रकाश वर्मा को आतंकी फंडिंग और फर्जी बैंक खातों के जरिए करीब सात करोड़ रुपये की आतंकी फंडिंग व अवैध लेन-देन का झूठा आरोप लगाया और डिजिटल हाउस अरेस्ट कर लिया.
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आतंकी फंडिंग में लेनदेन में नाम को लेकर डराया
आरोपियों ने पीड़ित को डराया कि आतंकी फंडिंग में लेनदेन का तुम्हारा नाम आया है अब तुमको 10 साल के लिए जेल जाना पड़ेगा. हमारे अधिकारी तुमको गिरफ्तार करने पहुंच रहे हैं. गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखने का दावा किया और लगातार ऑनलाइन निगरानी में रखा गया. पकड़े गए इन शातिर अपराधियों ने जांच और वेरिफिकेशन के नाम पीड़ित के बैंक अकाउंट से 54लाख 60 हज़ार रुपये दो अलग-अलग बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिया. ये बैंक अकाउंट इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के थे.
कौन है नीट का छात्र उजैर खान
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि आरोपी उजैर खान ने पूछताछ में बताया कि वो लखनऊ में नीट की तैयारी कर रहा था. लखनऊ के खदरा में रहता था और मूल रूप से कैसरगंज बहराइच का रहने वाला है. आरोपी उजैर खान तमाम बैंक खाते जुटाने, कैश को ऑनलाइन के जरिये आगे अलग-अलग खातों में भेजने और पैसों को ट्रेस होने से बचाने की रणनीति तैयार करता था. डीसीपी क्राइम ने बताया कि ठगी के पैसे उजैर खान ही अपने साथियों में ट्रांसफर करता था या नहीं? इसकी अभी जांच की जा रही है. इस नेटवर्क में इन चारों के अलावा कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं, अभी कार्रवाई जारी है.
बाकी तीन आरोपियों की कुंडली
डीसीपी ने आगे बताया कि आरिफ इकबाल लोन एजेंट बनकर लोगों को आसान तरह से लोन दिलाने का झांसा दे कर उनके बैंक अकाउंट और जानकारी लेकर अपने गैंग को मुहैया कराता था. सबमर्सिबल पाइप का काम करने वाला मोहम्मद सुफियान कम पढ़े लिखे लोगो के बैंक अकाउंट की जानकारी जुटाकर गैंग को मुहैया कराता था. लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलिंग और प्लॉट ब्रोकरिंग का काम करने वाला मोहम्मद आजम बैंक अकाउंट लेकर ठगी के पैसों को ऑनलाइन के माध्यम भेजता, ताकि ट्रेस न हो सके. पुलिस आगे इन पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है.
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