लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड में शुक्रवार को विकास प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की है. लखनऊ विकास प्राधिकरण की टीम ने बिल्डिंग पर बुलडोजर चलाने का नोटिस चस्पा किया है. इमारत के मालिकों को 15 दिनों का मौका दिया गया है. इमारत के निर्माण के दौरान मानचित्र में अनदेखी करने का मामला सामने आया है. लखनऊ विकास प्राधिकरण के जोनल अफसर माधवेश कुमार और लखनऊ विकास प्राधिकरण की टीम ने नोटिस चस्पा किया है. 25 जुलाई को बिल्डिंग गिराए जाने पर फैसला लिया जाएगा.

बता दें, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हाल ही इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नर से जवाब तलब किया था. आयोग ने लखनऊ के डीएम और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ मांगी है.

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13 अफसरों पर गाज!

सूत्रों के मुताबिक, इस हादसे की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है. रिपोर्ट में लखनऊ विकास प्राधिकरण के 6 IAS अधिकारियों, 7 PCS अधिकारियों और करीब 100 इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है. बताया जा रहा है कि जांच के दायरे में साल 2016 से 2024 के बीच जोन-4 और जोन-5 में तैनात रहे प्रवर्तन, जोनल और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी शामिल हैं. SIT ने अपनी जांच में य जानने की कोशिश की कि जिस इमारत में आग लगी, वहां निर्माण और संचालन के दौरान किन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती थी और किस लेवल पर लापरवाही हुई.

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15 लोगों की गई थी जान

22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी में मौजूद एक अवैध रूप से चलाई जा रही कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग लग गई थी. इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की जान चली गई थी, जबकि 9 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे. घटना के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे. जांच के दौरान सबसे बड़ा सवाल ये सामने आया कि रेसिडेंशियल लैंड्स पर सालों तक कमर्शियल एक्टिविटीज कैसे चलती रहीं.