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70 साल और 4 पीढ़ियों के बाद हुआ जमीन विवाद का निपटारा, सुप्रीम कोर्ट ने किसके हक में सुनाया फैसला?

साल 1999 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई के बाद अपीलकर्ताओं के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सेल डीड ‘यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम’ की धारा 154 के तहत शून्य (void) थी और इसे ठीक से साबित नहीं किया गया था.

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देश की न्याय व्यवस्था में सालों-साल खिंचने वाले मुकदमों की फेहरिस्त में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद पुराने और जटिल जमीन विवाद का निपटारा करते हुए चार पीढ़ियों से चली आ रही कानूनी लड़ाई को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने साल 1957 में साइन की गई एक सेल डीड की वैधता को बरकरार रखते हुए अपीलकर्ता शराफत अली और उनके परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया है. उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से जुड़ा यह भूमि विवाद करीब सात दशकों से विभिन्न अदालतों में लंबित था, जिसका अंत अब देश की सबसे बड़ी अदालत के हस्तक्षेप से हुआ है.

क्या था पूरा मामला?


यह पूरा विवाद उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्थित नरसीपुर कलां गांव की 15.5 बीघा जमीन से जुड़ा है. अपीलकर्ता शराफत अली के पूर्वजों ने 4 जून 1957 को एक रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से यह जमीन खरीदी थी और तब से ही वे इस पर काबिज होने का दावा करते आ रहे थे. साल 1984 में विक्रेताओं में से एक द्वारा अपनी आपत्ति वापस लेने के बाद जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) खरीदारों के पक्ष में हो गया था.

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इसके बाद, 1991 में चकबंदी की कार्यवाही के दौरान उन्होंने भूमिधर के रूप में अपने अधिकारों को मान्यता देने की मांग की. हालांकि, शुरुआती दौर में चकबंदी अधिकारी ने उनके दावे को स्वीकार कर लिया था और 1993 के एक समझौते में भी उनके कब्जे की बात मानी गई थी, लेकिन अन्य सह-खातेदारों की आपत्तियों के बाद यह मामला दोबारा खुल गया.

निचली अदालतों का क्या था रुख?


साल 1999 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई के बाद अपीलकर्ताओं के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सेल डीड ‘यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम’ की धारा 154 के तहत शून्य (void) थी और इसे ठीक से साबित नहीं किया गया था. इस फैसले के खिलाफ की गई अपीलों को भी प्रशासनिक और समीक्षा प्राधिकारियों ने खारिज कर दिया. साल 2017 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी खरीदार पक्ष की रिट याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसलों पर अपनी मुहर लगा दी थी.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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