उत्तर प्रदेश के काशी में एक ऐसा मामला सामने आया, जो किसी का भी दिल छू लेगा. 22 जुलाई को नथईपुर गांव में रहने वाले वेद प्रकाश दुबे के पालतू कुत्ते कल्लू की मौत हो गई थी, जिसके बाद सोमवार यानी 3 अगस्त को परिवार ने उसकी आत्मा शांति के लिए तेरहवीं पूजन किया. कल्लू देसी नस्ल का कुत्ता था. दरअसल, काशी में भगवान शिव और भैरव बाबा की पूजा की जाती है, यही वजह से कि भैरव बाबा की सवारी यानी कुत्ते को भी बेहद खास माना जाता है. कहा जाता है खासतौर पर काले कुत्ते को खाना खिलाना काफी शुभ होता है.

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तेरहवीं में शामिल हुए सैकड़ों गांववाले

कल्लू की तेरहवीं में शामिल होने के लिए सैकड़ों गांव वाले वेद प्रकाश दुबे के घर पहुंचे. उन्होंने वहां कल्लू की शांति के लिए प्रार्थना की और तेरहवीं का भोजन किया. दरअसल, वेद प्रकाश कॉपरेटिव डिपार्टमेंट के रिटायर्ड सेक्रेटरी हैं. उन्होंने बताया कि करीब 12 साल पहले एक काले रंग का देसी नस्ल का कुत्ता उनके दरवाजे पर आया, जिसे देखकर उनका दिल पिघल गया. पूरे परिवार ने खुले मन से उसको अपनाया और उसकी देखभाल करने लगे.

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कल्लू के आने के बाद बदला जीवन

वेद प्रकाश का कहना है कि जैसे ही उनकी लाइफ में कल्लू आया, बहुत कुछ बदल गया. वो एक तरह से उनके लिए लकी चार्म साबित हुआ. वेद प्रकाश के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो गई, जिसके बाद उन्होंने एक अच्छा घर बनवाया और जमीनें भी खरीदीं. वेद प्रकाश के बेटे दीपक घर से दूर रहकर एक प्राइवेट जॉब कर रहे थे, उन्होंने वापस लौटकर प्लास्टिक के छोटे बॉक्स बनाने की एक फैक्ट्री शुरू की. कुल मिलाकर, कल्लू के आने से वेद प्रकाश और उनके परिवार ने काफी तरक्की की.

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