ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने छात्राओं को स्कूल में हिजाब पहनने को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले पर ऐतराज़ जताया है. दरअसल, एक मुस्लिम स्टूडेंट ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी, जिसे खारिज कर दिया गया. ओवैसी ने हाई कोर्ट के फैसले को इस्लाम पर हमला बताते हुए कहा कि किसी भी कोर्ट को ये तय करने का हक नहीं है कि किस धर्म के लिए क्या जरूरी है और क्या नहीं.
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क्या बोले ओवैसी?
AIMIM प्रमुख ने कहा- ये हमारा धर्म है, इसलिए ये हम तय करेंगे कि क्या जरूरी है. ये तय करने वाले जज कौन होते हैं. ये हमारी धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा वार है. ओवैसी का मानना है कि इलाहबाद हाई कोर्ट का फैसला संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) के खिलाफ है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में शबरीमाला केस पर नौ जजों की बेंच विचार कर रही है तो इलाहबाद हाई कोर्ट धर्म से जुड़े मामले पर टिप्पणी क्यों कर रहा है. ओवैसी ने कहा कि कोर्ट के ऐसे फैसलों से मुस्लिम बच्चियों पर बुरा असर पड़ेगा.
'हिजाब पहनना उनकी मर्जी है'
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यूपी में वैसे ही स्कूलों में मुस्लिम छात्राएं बेहद कम है, अगर कोर्ट इस तरह के फैसले सुनाएगा तो छात्राओं को स्कूल जाने में और भी मुश्किल आएगी. उन्होंने आगे कहा कि हिजाब पहनना किसी भी लड़की की अपनी मर्जी है. ओवैसी ने कहा- ''वो अपने सिर पर हिजाब पहन रही है, दिमाग पर नहीं. समानता का मतलब ये नहीं होता कि हर किसी पर एक जैसा नियम जबरन थोप दिया जाए''. दरअसल, प्रयागराज की एक 11वीं क्लास की छात्रा ने हिजाब पहनने को लेकर याचिका दायर की थी. उसने 10वीं तक स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहना था, लेकिन 11वीं क्लास में आने के बाद हिजाब पर रोक लग गई. छात्रा ने हिजाब पहनने की अनुमति को लेकर इलाहबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसे खारिज कर दिया गया. कोर्ट ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को अपने नियम और यूनिफॉर्म कोड लागू करने का पूरा हक है.
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