Azam Khan statement in Supreme Court: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर विचार करने से शीर्ष अदालत ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया है. मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच कर रही थी.
लिवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार आजम खान की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत में अंतरिम जमानत की मांग करते हुए कहा, “मैं हर चीज का सामना करने को तैयार हूं, लेकिन मुझे जमानत चाहिए. मुझे ईडी केस में गिरफ्तार किया गया है और मुझ पर 28 अन्य मामले भी दर्ज हैं. ऐसे में तो मैं जेल में ही मर जाऊंगा.”
सिब्बल ने मामलों की प्रकृति पर उठाया सवाल
सिब्बल ने आरोप लगाया कि जैसे ही आजम खान जेल से बाहर आए, ईडी ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया. यह पूरी कार्रवाई आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उन्हें जेल में रखने के मकसद से की गई है. सिब्बल ने मामलों की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला 2006 का है और एफआईआर 2019 में दर्ज हुई, ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का मामला कैसे बनता है? उन्होंने दलील दी कि दर्ज मामलों में 5 हजार रुपये, एक तोला सोने की बालियां और 4 बकरियां लूटने जैसे आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या बकरी और गाय अब अपराध से अर्जित आय बन गई हैं?
इस पर सीजेआई की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी बात में दम हो सकता है, लेकिन हम इस पर कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहते.” सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट ही उचित मंच है.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में क्या था?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 78 वर्षीय आजम खान की ओर से कहा गया कि वे रामपुर से दस बार विधायक, पूर्व मंत्री और सांसद रहे हैं. राजनीतिक बदले की भावना और सत्ता के दुरुपयोग के चलते उन्हें अनिश्चित काल तक जेल में रखने की कोशिश की जा रही है. साथ ही 1 नवंबर को विशेष अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को चुनौती दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने दो दिनों के भीतर याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचाने का निर्देश दिया है और हाई कोर्ट से कहा है कि वह ईडी मामले में आजम खान की जमानत याचिका पर 16 नवंबर को ही अंतरिम आदेश पारित करे.